प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनगणना को एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए नागरिकों से अपील की कि वे ऑनलाइन खुद अपनी जानकारी दर्ज करें, ताकि देश के भविष्य की योजना बनाने के लिए सटीक आंकड़े सुनिश्चित किए जा सकें। अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उन्होंने बताया कि अब तक 2.6 करोड़ से ज्यादा लोगों ने मोबाइल फोन के जरिये जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करके स्व-गणना प्रक्रिया पूरी कर ली है। उन्होंने कहा, ‘‘जनगणना हम सभी के लिए एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
यह देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपके और आपके परिवार के बारे में सही जानकारी देश के भविष्य की सटीक तस्वीर बनाने में मदद करती है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन स्व-पंजीकरण सेवा बहुत सुविधाजनक है, जिससे नागरिक अपने और अपने परिवार के बारे में जानकारी सीधे अपने मोबाइल फोन से आसानी से दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी के अलावा, यह सुविधा 16 क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा, “देश की एक भव्य तस्वीर उभर रही है।
इस तस्वीर में आप, आपका परिवार और आपके पड़ोसी भी शामिल हैं। मैं भारत की जनगणना की बात कर रहा हूं। इस प्रक्रिया का पहला चरण सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में लगभग पूरा हो चुका है।”
मोदी ने कहा कि 32 करोड़ से ज्यादा परिवारों का आंकड़ा पहले ही दर्ज किया जा चुका है और लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के दूर-दराज, बर्फ से ढके इलाकों में अभी काम चल रहा है।
उन्होंने कहा, “इसके लिए आपको जनगणना पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा। अपने मोबाइल नंबर से पोर्टल पर लॉग-इन करें, अपनी लोकेशन डालें, अपने परिवार के बारे में जानकारी भरें और जानकारी दाखिल करें।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में लगभग 15 से 20 मिनट लगते हैं और इसके लिए कोई भी दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “जानकारी जमा करने के बाद आपको एक खास आईडी मिलेगी।
जब जनगणना करने वाला कर्मचारी आपके घर आए, तो आप यह आईडी उन्हें दिखा सकते हैं। आपके द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि होने के बाद, यह जनगणना रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएगी।”
प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो प्रसारण में पर्यावरण और जानवरों की सुरक्षा के बारे में भी बात की। मोदी ने कहा कि जब लोग पर्यावरण की रक्षा करते हैं, तो वे सिर्फ पेड़-पौधों या जानवरों को ही नहीं बचाते, बल्कि पूरे परिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही कुछ पहल इस भावना को बहुत खूबसूरती से उजागर कर रही हैं। असम के सोनाई रूपई वन्यजीव अभयारण्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब इस इलाके में हाथी रहते थे, लेकिन जैसे-जैसे वन भूमि पर इंसानी दखल बढ़ा, हाथी वहां से चले गए। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले इस जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था और इसके नतीजे बहुत अच्छे रहे हैं- हाथी यहां वापस आ गए हैं।
उन्होंने कहा, “हाथियों के झुंड फिर से उन इलाकों में देखे जा रहे हैं, जहां वे कई साल से दिखते नहीं थे।”
खेलों के लिए प्रतिभा खोज अभियान के बारे में लाल किले से की गई अपनी घोषणा का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पंजाब में हॉकी खिलाड़ी राजिंदर सिंह सराहनीय काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिंह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके नाम के साथ ‘सीनियर’ शब्द जुड़ा है और वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने 1980 के ओलंपिक में हॉकी में स्वर्ण पदक जीता था। अब वे ‘राउंड ग्लास हॉकी एकेडमी’ के जरिये अपने जुनून को आगे बढ़ा रहे हैं।
उनकी कोशिशों से गांवों में हॉकी के लिए नये एस्ट्रो-टर्फ लगाए जा रहे हैं। राजिंदर जी का मकसद बिल्कुल साफ है: ऐसे गांवों के बच्चों की पहचान करना, जहां अच्छी कोचिंग की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सिंह की कोशिशों की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘ऐसी पहल के जरिये, कई खिलाड़ी भारत के जूनियर और सीनियर स्तर पर जगह बना रहे हैं।’’
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सितंबर का महीना कुपोषण के खिलाफ लड़ाई के लिए समर्पित है और इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के लोग और संगठन इस नेक काम के लिए एक साथ आते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस साल कुपोषण से निपटने के लिए कई सराहनीय पहल शुरू की गई हैं।’’ इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र तथा मिजोरम में इस दिशा में उठाए गए कदमों का जिक्र किया। मोदी ने कहा कि ऐसी कोशिशें वाकई तारीफ के काबिल हैं और उन्हें आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े सभी लोगों पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘‘ये आंगनवाड़ी केंद्र अब “पोषण ट्रैकर’ के जरिये डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं और इस मंच पर लगभग नौ करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की बेहतर देखभाल संभव हो पाई है।
हमें कुपोषण के खिलाफ यह लड़ाई उसी जोश के साथ जारी रखनी होगी; हमें अपने समाज को पूरी तरह से कुपोषण-मुक्त बनाना है।
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