प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्यों के साथ बैठक कर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को तेज करने के उपायों पर चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
ईएसी-पीएम के सदस्यों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत और दुनिया पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर आकलन भी पेश किया।
प्रधानमंत्री और उनकी सलाहकार परिषद के सदस्यों ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच आर्थिक वृद्धि को मजबूत करने के लिए कई विचारों एवं नीतिगत उपायों पर चर्चा की।
सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में ‘जीवन की सुगमता’ और ‘कारोबारी सुगमता’ को और बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न सुधारों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
ईएसी एक स्वतंत्र निकाय है जो भारत सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री को आर्थिक एवं संबंधित मुद्दों पर सलाह देता है।
इस बैठक में सलाहकार परिषद के सदस्यों के अलावा प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा एवं शक्तिकांत दास भी शामिल हुए।
वर्तमान में ईएसी में एक चेयरमैन, तीन पूर्णकालिक सदस्य और 11 अंशकालिक सदस्य हैं। इसके प्रमुख एस. महेंद्र देव हैं, जबकि संजय कुमार मिश्रा, संजीव सान्याल और शामिका रवि पूर्णकालिक सदस्य हैं।
परिषद के 11 अंशकालिक सदस्यों में राकेश मोहन, साजिद जेड चिनॉय, नीलकंठ मिश्रा, नीलेश शाह, टीटी राम मोहन, सौम्य कांति घोष, केवी राजू, चेतन घाटे, पामी दुआ, पुलक घोष और गौरव वल्लभ शामिल हैं।
ईएसी के कार्यक्षेत्र में प्रधानमंत्री द्वारा संदर्भित किसी भी आर्थिक या अन्य मुद्दे का विश्लेषण करना और उस पर सलाह देना, व्यापक आर्थिक महत्व के मुद्दों पर विचार प्रस्तुत करना शामिल है।
ये कार्य या तो स्वतः संज्ञान के आधार पर या प्रधानमंत्री अथवा किसी अन्य के संदर्भ पर किए जा सकते हैं। परिषद समय-समय पर प्रधानमंत्री द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य भी करती है।
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