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शरद पवार ने मंगलवार को पश्चिम एशिया संकट पर पीएम नरेंद्र मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में सभी दलों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना देशहित के लिए जरूरी है।
पवार ने X पर लिखा- पीएम मोदी ने अचानक जनता से सोना न खरीदने, पेट्रोल और डीजल कम खर्च करने की अपील की है। इससे अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। अचानक हुई इन घोषणाओं से आम लोगों और कारोबारियों के बीच बेचैनी बढ़ी है।
इधर, ज्वेलरी काउंसिल का कहना है कि पीएम को उनसे बात करनी चाहिए थी। पीएम के अपील से हमारी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।
दरअसल, पीएम मोदी ने लगातार दो दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की।
हालांकि, इस बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। भारत के पास 69 दिन का कच्चे तेल और 45 दिन का LPG स्टॉक मौजूद है।

ज्वेलर्स बोले- रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा
महाराष्ट्र स्वर्णकार सराफा महामंडल के अध्यक्ष पुरुषोत्तम कवाले ने कहा देशभर के ज्वेलर्स में चिंता बढ़ गई है। इतना बड़ा फैसला लेने से पहले ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल और महाराष्ट्र बोर्ड से चर्चा होनी चाहिए थी। सरकार को पहले हमारी राय लेनी चाहिए थी।
कवाले ने कहा- अगर कारोबार बंद हुए तो जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार इन लोगों को रोजगार देगी? ऐसी कोई गारंटी नहीं है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के गुजरात अध्यक्ष नैनेश पच्छीगर ने कहा कि हम देश के साथ हैं और ‘नेशन फर्स्ट’ में भरोसा रखते हैं। लेकिन ज्वेलरी कारोबार से छोटे और मझोले स्तर के लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। सरकार को फैसला लेते समय इनके रोजगार और आगे पड़ने वाले असर का भी ध्यान रखना चाहिए।
PM की अपील पर केजरीवाल के 3 सवाल, कहा- देश को अर्थव्यवस्था की स्थिति बताएं
AAP नेता और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने पश्चिम एशिया संकट के बीच PM मोदी की अपील पर कहा कि देश हैरान है। प्रधानमंत्री को अर्थव्यवस्था की स्थिति पर साफ जानकारी देनी चाहिए।
- देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत क्या है, आगे क्या होने वाला है?
- ईरान-अमेरिका युद्ध का असर दुनिया पर है, फिर दूसरे देशों की तरह भारत में ऐसी अपील क्यों की गई?
- पूरा बोझ सिर्फ मिडिल क्लास पर क्यों डाला जा रहा है, सरकार पहले खुद त्याग क्यों नहीं करती?
पीएम ने 7 अपील की थी, कहा- भारत में तेल के कुएं नहीं, पेट्रोल कम यूज करें
- पीएम मोदी रविवार को कहा था, ‘आज के समय में पेट्रोल, गैस और डीजल का इस्तेमाल कम करना होगा। पड़ोस में चल रहे युद्ध के असर से दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। भारत पर इस वैश्विक संकट का असर ज्यादा है, हमारे पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं।’
- पेट्रोल, गैस और डीजल बचाने के लिए हमें वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों की जरूरत है।
- अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें। मेट्रो में सफर और कारपूलिंग करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को उसमें बैठाकर ले जाएं।
- हर परिवार अगर खाने के तेल का इस्तेमाल थोड़ा कम करे तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी।
- देश को रासायनिक उर्वरकों की खपत आधी करने का लक्ष्य रखना चाहिए और तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
- शादियों, छुट्टियों और अन्य कारणों से विदेश यात्रा कुछ समय के लिए टालना देशहित में होगा।
- सोने के आयात में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। देशहित में लोगों को एक साल तक सोना खरीदने और दान करने से बचना चाहिए।
राहुल ने कहा था- देश चलाना मोदी के बस की बात नहीं
राहुल गांधी ने सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी की अपीलों पर पलटवार किया था। उन्होंने इसे नाकामी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि अब देश चलाना प्रधानमंत्री के बस में नहीं रह गया है।
X पर एक पोस्ट में राहुल ने लिखा था- ‘कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा। सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने के तेल का उपयोग घटाओ, मेट्रो से चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं हैं। ये विफलता हैं।’ 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है। क्या खरीदें, क्या नहीं। कहां जाए, कहां नहीं।’

इन 4 मदों में ही इस साल 22 लाख करोड़ रुपए खर्च हो रहे
1. सोने में सालाना 6 लाख करोड़ खर्च: भारत में हर साल सोने के आयात पर लाखों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। 2024-26 में यह आंकड़ा 4.89 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 6.40 लाख करोड़ रुपए रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग गहनों से भी ज्यादा है।

2. विदेश यात्रा- 3 लाख करोड़ उड़ा रहे: 2023-24 में विदेश यात्राओं में भारतीयों का कुल खर्च 2.72 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 3.65 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी भारतीयों ने विदेशों में खर्च बढ़ा दिया है।
3. फर्टिलाइजर- 1.50 लाख करोड़ आयात: इस साल भारत ने विदेशों से 1.50 लाख करोड़ रुपए का फर्टिलाइजर खरीदा है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 76% ज्यादा है। हम सबसे ज्यादा फर्टिलाइजर कतर से आयात करते हैं, जो ईरान के हमलों की चपेट में है। इसलिए फर्टिलाइजर के दाम चढ़े हुए हैं।
4. कच्चा तेल- इस साल 10 लाख करोड़ रु. का तेल आयात करना पड़ा: भारत जरूरत का 70% तेल आयात करता है। इस पर 2024-25 में 11.66 लाख करोड़ खर्च हुए। क्रूड के भाव घटने से 2025-26 में खर्च 10.35 लाख करोड़ रुपए था। पिछले दो महीने के युद्ध में क्रूड 50% महंगा हुआ है। ऐसे में खर्च 17 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा था कि भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि LPG का 45 दिन का स्टॉक है। लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…
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