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ईएमआई चूकने पर बैंक अक्सर लोन सेटलमेंट का विकल्प देते हैं. पहली नजर में यह आसान और राहत भरा समाधान लगता है. लेकिन सेटलमेंट और पूरा कर्ज चुकाने में बड़ा अंतर होता है. गलत फैसला आपके क्रेडिट स्कोर पर सालों तक असर डाल सकता है.
EMI में चूक के बाद सेटलमेंट का ऑफर? आपका क्रेडिट स्कोर बिगड़ सकता है. (Image:AI)
सेटलमेंट का असली मतलब क्या है?
जब आप लोन सेटल करते हैं, तो असल में आप पूरा कर्ज नहीं चुका रहे होते. आप बैंक से यह अनुरोध कर रहे होते हैं कि वह तय रकम से कम में समझौता कर ले. आमतौर पर यह स्थिति तब आती है, जब कई ईएमआई बकाया रह जाती हैं और खाता डिफॉल्ट की श्रेणी में पहुंच जाता है. आपकी नजर में आपने पैसा देकर मामला खत्म कर दिया, लेकिन बैंक के रिकॉर्ड में यह दर्ज रहता है कि आपने मूल समझौते की पूरी शर्तें पूरी नहीं कीं. यही फर्क आगे चलकर आपके लिए मुश्किल बन सकता है.
क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है सीधा असर
लोन सेटल होने के बाद बैंक क्रेडिट ब्यूरो, जैसे CIBIL, को इसकी जानकारी देता है. वहां आपके खाते की स्थिति ‘सेटल्ड’ के रूप में दर्ज होती है, न कि ‘क्लोज्ड’ या ‘पेड इन फुल’ के रूप में. यह एक शब्द भविष्य के लिए बड़ा संकेत बन जाता है. आने वाले समय में जब आप नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेने जाएंगे, तो बैंक देखेंगे कि आपने पिछला कर्ज पूरी तरह नहीं चुकाया था. इससे आपका क्रेडिट स्कोर गिर सकता है और कई सालों तक असर बना रह सकता है. कुछ मामलों में लोन मिल भी जाए, तो ब्याज दर ज्यादा लग सकती है.
कब सही है सेटलमेंट का रास्ता?
अगर आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और पूरा कर्ज चुकाना संभव नहीं है, तो सेटलमेंट कानूनी झंझट और बढ़ते जुर्माने से बचने का एक रास्ता हो सकता है. लेकिन अगर आपके पास और विकल्प मौजूद हैं- जैसे लोन की अवधि बढ़वाना, किस्त कम करवाना या अस्थायी राहत मांगना- तो पहले उन्हें आजमाना बेहतर होता है. पूरी तरह चुकाया गया लोन आपके क्रेडिट इतिहास को मजबूत बनाता है, जबकि सेटल किया गया लोन उसे कमजोर करता है. किसी भी समझौते से पहले बैंक से साफ पूछें कि रिपोर्ट में स्थिति कैसे दर्ज होगी और हर शर्त लिखित में लें. आज की राहत कहीं आने वाले सालों की परेशानी न बन जाए, यह समझदारी इसी में है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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