पहला कदम: अपना ‘फ्रीडम नंबर’ तय करें
कौशिक कहते हैं कि सबसे पहले अपना फाइनेंशियल फ्रीडम नंबर तय करें. यानी आपको हर महीने कितनी रकम चाहिए, यह साफ समझें. यही आपका लक्ष्य होगा. जब आपकी आय का स्थायी स्रोत इस खर्च को कवर करने लगे, तब आप आर्थिक रूप से आजाद हैं- चाहे आपकी सैलरी 50,000 रुपये हो या 5 लाख रुपये. लक्ष्य स्पष्ट होने से योजना बनाना आसान हो जाता है.
सिर्फ सैलरी पर निर्भर न रहें
दूसरा बड़ा कदम है आय के कई स्रोत बनाना. केवल एक नौकरी पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. फ्रीलांसिंग, कंसल्टिंग, छोटा सर्विस बिजनेस, किराये की आय, डिविडेंड देने वाले शेयर या डिजिटल प्रोडक्ट- ये सभी अतिरिक्त आय के रास्ते हो सकते हैं. अगर एक स्रोत बंद हो जाए, तो दूसरा सहारा दे सके. यही सोच आपको सुरक्षित बनाती है.
स्किल्स को बनाएं कमाई की मशीन
कौशिक का साफ संदेश है कि सिर्फ बचत से आजादी नहीं मिलेगी, कमाई बढ़ानी होगी. टेक्नोलॉजी, एआई टूल्स, कोडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, टैक्स प्लानिंग या ऑटोमेशन जैसी मांग वाली स्किल्स सीखें. इन स्किल्स को फ्रीलांसिंग, कंसल्टिंग या अपने बिजनेस में बदलकर आय बढ़ाई जा सकती है. जितनी तेजी से आय बढ़ेगी, उतनी जल्दी लक्ष्य के करीब पहुंचेंगे.
लाइफस्टाइल ट्रैप से बचें
आय बढ़ते ही बड़ी कार, महंगा घर या अनावश्यक सब्सक्रिप्शन लेने की आदत वित्तीय आजादी में देरी कर देती है. कौशिक सलाह देते हैं कि खर्च को स्थिर रखें और आय बढ़ने पर अंतर को निवेश करें. यही अतिरिक्त रकम भविष्य की संपत्ति बनाती है.
समझदारी से करें निवेश
बचत की गई राशि को खाली न बैठने दें. इंडेक्स फंड या ETF में विविध निवेश, ब्लू-चिप डिविडेंड शेयर और कुछ हिस्सा सुरक्षित साधनों में रखें. नियमित और अनुशासित निवेश से कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है. मुनाफे को दोबारा निवेश करने से लक्ष्य जल्दी हासिल होता है.
पैसे की समझ जरूरी
वित्तीय शिक्षा अनिवार्य है. किताबें पढ़ें, पॉडकास्ट सुनें, ऑनलाइन कोर्स करें. बिना समझ के दूसरों पर निर्भर रहना महंगा पड़ सकता है. जितनी अच्छी समझ होगी, उतनी कम गलतियां होंगी.
कड़वा सच: कोई शॉर्टकट नहीं
आर्थिक आजादी किस्मत या त्वरित अमीरी योजना से नहीं मिलती. यह रोजाना अनुशासन, कौशल विकास और निरंतर निवेश का नतीजा है. कौशिक का मानना है कि अगर 5-7 साल तक रणनीति पर टिके रहें, तो भविष्य ऐसा बन सकता है जहां खर्च चलाने के लिए बॉस या वेतन पर निर्भरता खत्म हो जाए. सही सोच, सही योजना और धैर्य- यही असली ब्लूप्रिंट है.
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