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पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि बात यह है कि हमारे देश को इस तरह के हालात का काफ़ी अनुभव रहा है। एशिया में, यहाँ तक कि दक्षिण कोरिया में भी फ़ैक्टरियाँ बंद हो रही थीं। इसलिए, ऐसे हालात में जब कोई समाधान निकलता है और शांति आती है, तो यह सभी के लिए अच्छा होता है, दुनिया के लिए अच्छा होता है। उन्होंने भारत के लिए आर्थिक फ़ायदों पर भी ज़ोर दिया, ख़ासकर ज़रूरी चीज़ों के आयात के मामले में।
थरूर ने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि इसके बाद, हमारे तेल और गैस, हमारे फ़र्टिलाइज़र, हमारे एल्युमीनियम की सप्लाई जो वहाँ से आती थी और जो सप्लाई वहाँ फंसी हुई थी, वे सभी आ पाएँगी। इसलिए, जब यह सब हो जाएगा, तो मुझे लगता है कि पूरे देश और दुनिया को इससे फ़ायदा होगा। ग्लोबल स्टेबिलिटी पर भारत का रुख़ दोहराते हुए उन्होंने कहा, “मेरी राय में, हम एक शांति-प्रिय देश हैं और हमें निश्चित रूप से इसका समर्थन करना चाहिए।”
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उनकी ये बातें तब सामने आई हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने वर्चुअली 14-पॉइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किए हैं। इसका मकसद दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म करना, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और प्रतिबंधों व ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत की 60-दिन की प्रक्रिया शुरू करना है।
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