आपकी भावनाओं को झगड़े का नाम देना
जब भी आप अपने मन की बात कहने की कोशिश करते हैं या बताते हैं कि आपको क्या बुरा लगा, तो वे तुरंत आप पर आरोप लगा देते हैं कि आप झगड़ा शुरू कर रहे हैं। उनके लिए अपनी बात रखने का कोई सही समय कभी आता ही नहीं।
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सिर्फ अपनी उम्मीदें थोपना
वे चाहते हैं कि आप बिना कहे उनकी हर जरूरत पूरी कर दें, लेकिन जब आपकी जरूरतों की बात आती है, तो वे उसे अनदेखा कर देते हैं। अगर आप हक से कुछ मांग लें, तो आपको डिमांडिंग या जरूरत से ज्यादा उम्मीद रखने वाला बता दिया जाता है।
हर बात में आपको ही दोषी ठहराना
बातों-बातों में वे ऐसी पलटी मारते हैं कि मुद्दा चाहे जो भी हो, आखिर में गलती आपकी ही निकलती है। वे अपनी सफाई देने में इतने माहिर होते हैं कि आप खुद को ही समस्या मानने लगते हैं।
माफी न मांगना और बात को दबा देना
झगड़े के बाद वे कभी अपनी गलती मानकर माफी नहीं मांगते। वे बस कुछ समय बाद ऐसे बर्ताव करने लगते हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो। बिना बात सुलझाए आगे बढ़ जाना जख्म को भरने नहीं देता।
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आपकी भावनाओं का मजाक उड़ाना
अगर आप किसी बात पर दुखी होते हैं या रिएक्ट करते हैं, तो वे आपको ओवर-सेंसिटिव या ड्रामा क्वीन/किंग कह देते हैं। आपके इमोशन्स को आपकी कमजोरी या कमी की तरह दिखाया जाता है।
खुद की गलती न देखना
उनमें खुद के व्यवहार पर गौर करने की काबिलियत ही नहीं होती। वे कभी यह नहीं सोचते कि उनकी किसी हरकत का आप पर क्या असर पड़ रहा है। अपनी जवाबदेही लेना उनके बस की बात नहीं।
हमेशा विक्टिम कार्ड खेलना
उनके लिए हर गलती की वजह कोई और होता है। वे कभी खुद को गलत नहीं मानते, बल्कि हमेशा खुद को बेचारा और दूसरों को विलेन साबित करने में लगे रहते हैं।
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