पीओके से ऐसी खबर सामने आई है जिसके इंतजार में भारत 79 सालों से था। 79 साल पहले पाकिस्तान ने भारत के इस इलाके पर कब्जा कर लिया था अवैध कब्जा। लेकिन इस इलाके को पाकिस्तान से छुड़वाने के लिए खुद पीओके की जनता ने ही अब सबसे बड़ी जंग छेड़ दी है। मजे की बात देखिए कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बलूचिस्तान में चुनाव का ऐलान किया गया था जिसके बाद भारत ने जमकर लताड़ लगाई थी और भारत की फटकार लगते ही पीओके ने पाकिस्तान का दहन शुरू कर दिया है। मैदान में जख्मी पड़े पाकिस्तानी फोर्सेस के ये जवान जो हैं ये अपने जख्मों को ही चाट रहे हैं। पीओके की पिटाई के बाद सदमे से निकलने की ये पूरी कोशिश कर रहे हैं। जान की भीख मांग रहे हैं। देखिए कैसे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई उसका खुलासा करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग खुद पाकिस्तान के खिलाफ खड़े हो गए और जो तस्वीरें सामने आई हैं उन्होंने इस्लामाबाद की नींद कैसे उड़ा दी है।
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दरअसल बता दें कि पीओके में लंबे समय से जनता कई मुद्दों को लेकर नाराज बताई जा रही है। लोगों का यह आरोप है कि उनके राजनीतिक अधिकार सीमित है। आर्थिक समस्याएं बढ़ रही हैं और फैसले स्थाई जनता की बजाय इस्लामाबाद से तय किए जाते हैं। इसी नाराजगी को लेकर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी यानी कि जैक लगातार आंदोलन चला रही है। अब इस आंदोलन को और भी ज्यादा हवा तब मिली जब पाकिस्तान ने चुनावी [संगीत] प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू की। जैक का यह कहना है कि विधानसभा में आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्थाई राजनीति को प्रभावित करती है और इससे बाहरी राजनीतिक दलों का दबदबा भी बना रहता है और यही वजह है कि हजारों लोग सड़कों पर उतरने लगे। लेकिन फिर हुआ वो जिसकी पाकिस्तान को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक प्रदर्शनकारी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार यानी कि जनाजे में बड़ी संख्या में लोग जुट गए। इसी दौरान हालात अचानक पीओके में बिगड़ने लगे। सुरक्षा बलों और स्थाई लोगों के बीच यहां पर झड़प हो गई और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। कई लोगों के घायल होने और कई मौतों की खबरें सामने आई हैं। जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और यहीं से पाकिस्तान के लिए मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई। इसके बाद बता दें कि पाकिस्तान ने सबसे पुराना हथियार निकाला। यानी कि इंटरनेट बंद कर दिया। सेना को पीओके में उतार दिया और विरोध को दबाने की कोशिश की।
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कई इलाके रावलकोट और कई अन्य इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया। इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा। प्रशासन ने हालात को कंट्रोल करने की कोशिश तो की लेकिन हालात कंट्रोल हुए नहीं। इंटरनेट बंद होने से गुस्सा नहीं रुका बल्कि और भी ज्यादा बढ़ गया। जैक ने बड़े आंदोलन और मार्च का ऐलान भी कर दिया है। दूसरी तरफ बता दें कि पाकिस्तान सरकार संगठन पर गंभीर आरोप लगा रही है। जबकि संगठन इन आरोपों को खारिज कर रहा है। यानी टकराव खत्म होने की बजाय और भी ज्यादा तेज होता हुआ दिखाई दे रहा है। 79 साल पहले जिस जमीन पर पाकिस्तान ने कब्जा किया था आज उसी जमीन पर पाकिस्तान को अपनी पकड़ बचाने के लिए सेना उतारनी पड़ रही है।
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