पाकिस्तान में क्रिप्टो करेंसी को लेकर इस वक्त जो घमासान मचा है, वो किसी आर्थिक आतंक की कहानी से कम नहीं लगता. एक तरफ पूरा देश ऐतिहासिक महंगाई, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और बेकाबू होती अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ आम पाकिस्तानी नागरिक अपनी जमा पूंजी को डूबने से बचाने के लिए किसी सहारे की तलाश में है. इसी खालीपन को क्रिप्टो करेंसी ने भरा है. लेकिन सरकार और स्टेट बैंक के लिए यही सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है. आखिर यह बवाल इतना बड़ा कैसे हो गया और पड़ोसी देश के अंदर चल क्या रहा है…
आखिर आम पाकिस्तानी क्रिप्टो की तरफ भागा क्यों?
पाकिस्तान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था से इसकी शुरुआत होती है. पिछले कुछ सालों में पाकिस्तानी रुपया लगातार कमजोर हुआ है. मुद्रास्फीति की दर कई बार 30 फीसदी के पार जा चुकी है. जब किसी देश की मुद्रा का यह हाल हो, तो लोगों का उस पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है. लोग चाहते हैं कि उनकी बचत किसी सुरक्षित जगह रहे, लेकिन पाकिस्तानी बैंकों में पैसा रखने का मतलब है महंगाई के हिसाब से उसकी कीमत लगातार गिरना.
पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान में रियल एस्टेट या सोने में निवेश हर किसी के बस की बात नहीं. ऐसे में क्रिप्टो, खासकर बिटकॉइन और USDT (टीथर) जैसी स्टेबल कॉइन, एक ऑल्टरनेटिव सेफ हेवन बनकर उभरी हैं. चैनालिसिस की ‘ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स’ रिपोर्ट में पाकिस्तान लगातार टॉप-10 देशों में शामिल रहा है. यह बताता है कि आम पाकिस्तानी कितनी तेजी से क्रिप्टो को अपना रहे हैं.
क्यों क्रिप्टो करेंसी सरकार की आंख की किरकिरी बन गई?
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) का रुख बेहद सख्त है. SBP ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान में किसी भी क्रिप्टो करेंसी को कानूनी मान्यता नहीं दी गई है. लेकिन सिर्फ कह देने से बात नहीं बनती. दरअसल, पाकिस्तान की सरकार के लिए क्रिप्टो एक बड़ा ‘काला धन’ का रास्ता बन चुकी है. पाकिस्तान फिलहाल IMF से एक और बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत कर रहा है. IMF ने पहले ही साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को अपने वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता लानी होगी और मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण (टेरर फाइनेंसिंग) पर लगाम लगानी होगी.
अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिप्टो का पूरा ढांचा डीसेंट्रलाइजेशन है, मतलब इस पर न तो सरकार का कंट्रोल है और न ही इसके लेन-देन को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. इससे सरकार के लिए टैक्स वसूलना मुश्किल हो जाता है और विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा अनियमित चैनलों से बाहर जाने लगता है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान में हर साल अरबों डॉलर की क्रिप्टो करेंसी P2P (पीयर-टू-पीयर) प्लेटफॉर्म्स के जरिए खरीदी-बेची जाती है, जिस पर सरकार की कोई नजर नहीं है.
क्रिप्टो बवाल की चिंगारी भड़क कैसे गई?
विदेश मामलों के जानकार और JNU के प्रोफेसर डॉ. राजन कुमार के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान में क्रिप्टो को लेकर जो बवाल मचा, उसके पीछे 3 ताजा और ठोस घटनाएं हैं:
- दमनकारी कार्रवाइयां और गिरफ्तारियां: पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने कुछ महीने पहले बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू की. कई शहरों में क्रिप्टो एक्सचेंज चला रहे लोगों को गिरफ्तार किया गया. उन पर आरोप लगा कि वो अवैध तरीके से डॉलर को देश से बाहर भेज रहे थे. यह कोई छोटी-मोटी कार्रवाई नहीं थी, इसने पूरे क्रिप्टो समुदाय को हिलाकर रख दिया.
- डिजिटल फ्रॉड और घोटाले: पाकिस्तान में क्रिप्टो के साथ सबसे बड़ी समस्या जागरूकता की कमी है. 2025 में कराची और लाहौर जैसे बड़े शहरों में कई ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पकड़े गए जो लोगों को क्रिप्टो में भारी मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गए. इन घोटालों ने आम लोगों का करोड़ों रुपये डुबो दिया और सड़कों पर प्रदर्शन हुए. इसने सरकार को क्रिप्टो के खिलाफ और सख्त रुख अपनाने का मौका दे दिया.
- बिजली संकट और क्रिप्टो माइनिंग: पाकिस्तान पहले से ही बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है. इसी बीच सरकार ने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान समेत देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर अवैध क्रिप्टो माइनिंग फार्म चल रहे हैं. यह बिजली चोरी करके चलाए जा रहे हैं. इसके बाद प्रशासन ने भारी तादाद में माइनिंग मशीनें जब्त कीं और कनेक्शन काट दिए. इसने एक नए तरह के आर्थिक अपराध को जन्म दे दिया.
तो क्या पाकिस्तान में क्रिप्टो का खेल खत्म?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. बवाल चाहे जितना भी मचा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तान में क्रिप्टो की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगा है. इसकी वजह भरोसे का संकट ही है. लोगों को न तो सरकारी नीतियों पर भरोसा है और न ही पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम पर. FIA की कार्रवाई के बाद भी लोग भूमिगत तरीके से P2P नेटवर्क और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुपों के जरिए क्रिप्टो का लेन-देन कर रहे हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तानी सरकार खुद दुविधा में है. वो जानती है कि पूरी तरह से बैन लगाना नामुमकिन है. इसलिए, खबरें हैं कि पाकिस्तान सरकार अब सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने की कोशिश कर रही है. इससे क्रिप्टो को एक कानूनी दायरे में लाया जा सकेगा और उस पर टैक्स वसूली होगी.
फिलहाल जो खींचतान चल रही है, वो एक ऐसे देश की कहानी कहती है जहां राज्य की कमजोरी और जनता की मजबूरी के बीच क्रिप्टो करेंसी एक जंग का मैदान बन चुकी है. यह बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा.
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