पाकिस्तान की सेना चाहे अफगानिस्तान हो या फिर खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत हर तरफ आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के नाम पर पश्तूनों को मौत के घाट उतार रही है. शनिवार की आधी रात में अफगानिस्तान पर की गई स्ट्राइक में नंगरहार प्रांत के बेसुद जिले में पाकिस्तानी सेना ने एक रिहायशी मकान को निशाना बनाया था, जिसमें 11 बच्चों समेत 17 लोगों को मौत हो गई. ये सभी 17 अफगानिस्तान के आम शहरी थे और पश्तून थे.
अफगानिस्तान के अलावा अपने खुद के देश में भी पाकिस्तानी सेना ने कल खैबर पख्तूनख्वाह के ओरक्जाई जिले की तिराह घाटी में भी एक गाड़ी पर मोर्टार से फायर कर दिया, जिसमें 2 बच्चों समेत 5 पश्तूनों की मौत हो गई. घटना के बाद जब लोगों ने पाकिस्तानी पोस्ट पर जाकर प्रदर्शन किया तो निहत्थे पश्तूनों पर पाकिस्तान की पंजाबी बाहुल्य सेना ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी जिसमे तकरीबन 8 आम स्थानीय पश्तून घायल हो गए.
आतंकवाद के नाम पर पश्तूनों को टारगेट कर रही पाक सेना
पाकिस्तान की सेना बीते लगभग 1 साल से आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर अपने देश में रहने वाले पश्तूनों के मकानों, गाड़ियों, निकाह कार्यक्रमों में कभी ड्रोन से तो कभी मोर्टार से हमले कर रही है और इन हमलों में 168 से ज़्यादा आम पश्तूनों की जान जा चुकी है जिसमें 39 बच्चे और 83 महिलाएं शामिल हैं. साथ ही अफगानिस्तान में भी आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर पाकिस्तान सितंबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक 88 आम पश्तूनों की जान ले चुका है, जिसमें 29 से ज्यादा बच्चे और 16 से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं.
PAK-अफगान में 94% पश्तून आबादी
दुनिया भर की 94% पश्तून आबादी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहती है. जहां अफगानिस्तान की कुल जनसंख्या में 65% से ज़्यादा लोग पश्तून हैं तो पाकिस्तान कुल आबादी में 15 फीसदी पश्तून है जो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में रहती है. साथ ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले ये पश्तून पश्तो बोलते हैं.
पाकिस्तान ने फ्रंटियर गांधी को भी नहीं बख्शा
1947 में बंटवारे के बाद से ही पाकिस्तान में पंजाब से ताल्लुक रखने वाले नेताओं और सैन्य अधिकारियों का दबदबा रहा है और पश्तूनों को पाकिस्तानी हुकूमत के हाथों अत्याचार का सामना करना पड़ा है. पश्तूनों के सबसे बड़े नेता खान अब्दुल गफ्फार खान उर्फ फ्रंटियर गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही बंटवारे का विरोध किया था और बाद में पश्तूनों के लिए अलग देश की मांग की थी, जिस कारण उन्हें भी कई बार पाकिस्तानी हुकूमत ने जेल भेजा और बंटवारे के बाद से ही पश्तूनों पर पाकिस्तानी सेना का जुल्म जारी रखा क्योंकि पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं को लगता था कि पश्तून पाकिस्तान की एकता के लिए खतरा हैं.

डूरंड लाइन को नहीं मानते पश्तून, इसीलिए चिढ़ा पाकिस्तान
मौजूदा समय में पाकिस्तान में रहने वाले पश्तून और अफगानिस्तान के पश्तून पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा डूरंड लाइन को नहीं मानते हैं क्योंकि उनके मुताबिक, हेरात से लेकर खैबर पख्तूनख्वाह तक का इलाका सिर्फ और सिर्फ पश्तूनों का रहा है और उनके पूर्वज पुराने समय में एक जगह से दूसरी जगह कभी काम के लिए तो कभी सर्दी के मौसम में एक जगह से दूसरी जगह माइग्रेशन करते रहे हैं. इसी तरह पाकिस्तान में मौजूद उसका सबसे बड़ा विरोधी आतंकी संगठन तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) भी खैबर पख्तूनख्वाह में मौजूद है और उसके सभी टॉप कमांडर पश्तून हैं जिस वजह से पाकिस्तानी सेना को लगता है कि खैबर पख्तूनख्वाह में रहने वाले पश्तून टीटीपी की मदद करते हैं और इसी कारण आए दिन पाकिस्तान खैबर पख्तूनख्वाह की आम पश्तून आबादी को ड्रोन हमलों और मोर्टार से निशाना बनाता रहता है.
पेन-पेंसिल की जगह पश्तूनों के हाथ में पकड़ाई बंदूकें
ऐतिहासिक नजरिए से अगर देखें तो पाकिस्तान ने अपने देश में रहने वाली पश्तून आबादी की पढ़ाई लिखाई और उन्हें आगे ले जाने के बजाए पहले 80 के दशक में उनका इस्तेमाल अफगान जिहाद के लिए किया, जहां पश्तूनों के हाथ में पेन-पेंसिल देने के बजाए सेना ने उनके हाथ में हथियार दिए और मुजाहिद्दीन बनाकर अफगानिस्तान में रूस से लड़ने के लिए भेजा. फिर अफगान जिहाद खत्म होने पर जब ये पश्तून वापस आने लगे तो इन्हें कश्मीर में जिहाद करने के पाकिस्तान ने भेजना शुरू किया, फिर 2001 में जब अमेरिकी सेना फिर से अफगानिस्तान पहुंची और तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया तो पाकिस्तान ने एक तरफ अपनी पश्तून आबादी को अमेरिका और नाटो के खिलाफ तालिबान के साथ लड़ने के लिए हथियार पकड़ाए और अमेरिका से आतंकवाद खत्म करने के लिए वजीरिस्तान और खैबर में अपनी ही पश्तून आबादी पर ड्रोन हमले भी करवाए.

पश्तूनों को 30 साल से कुचलने में जुटी सेना
पाकिस्तान आर्मी ना सिर्फ बीते 30 साल से अपने देश में रहने वाली पश्तून आबादी पर दमन कर रही है और उन्हें हमेशा आतंकवाद के लिए इस्तेमाल करती है बल्कि अफगानिस्तान में रहने वाले पश्तूनों को भी पाकिस्तान अपना दुश्मन मानती है. उसे लगता है कि अफगानिस्तान के पश्तून पाकिस्तान पर कब्जा करना चाहते हैं. चूंकि अफगानिस्तान के पश्तून ना सिर्फ पूरे खैबर पख्तूनख्वाह को अपना हिस्सा मानते हैं बल्कि बलूचिस्तान के क्वेटा को भी कंधार प्रांत का हिस्सा मानते हैं. इसी कारण पाकिस्तान हमेशा से ही अफगानिस्तान को अपने दुश्मन देश के तौर पर देखता रहा है और जब अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक सत्ता थी तब पाकिस्तान अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए तालिबान को पैसा और आतंकी सप्लाई करता था जो सरकारी ठिकानों और आम पश्तूनों की आतंकी हमले में जान लेते थे.
पश्तूनों को दुश्मन मानता है पाकिस्तान
अब जब अफगानिस्तान मे 15 अगस्त 2021 से तालिबान की सत्ता है जिसे उस समय पाकिस्तान ने अपना भाई बताया था और दावा किया था की तालिबान को अफगानिस्तान की सत्ता उसकी ही खुफिया एजेंसी ISI ने दिलवाई है, अब पाकिस्तान सीधा अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों पर हमले कर रहा है और पश्तूनों की जान ले रहा है. कुल मिलाकर पाकिस्तान के लिए चाहें पश्तून अफगानिस्तान के हों या फिर पाकिस्तान के उनकी जान की कोई कीमत नहीं है जब वो चाहता है तब पश्तूनों का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए करता है और फिर अपने मन माफिक कभी अफगानिस्तान में पश्तूनों के घरो, मदरसों, दुकानों पर हवाई हमले करता है तो कभी अपने देश में रहने वाले पश्तूनों पर ड्रोन से हमले.
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