हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। मौजूदा नियमों में किसी स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर खुद के शेयरों की सेल्फ-लिस्टिंग की स्पष्ट अनुमति नहीं है। NSE को बाजार ढांचे से जुड़ी संस्था (Market Infrastructure Institution) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसलिए अपने प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग शुरू करने से पहले उसे SEBI से विशेष मंजूरी लेनी होगी। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार इस संबंध में चर्चा जारी है और अंतिम फैसला नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करेगा।
NSE के प्लेटफॉर्म पर पहले से ही ऐसी कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग होती है, जो वहां औपचारिक रूप से लिस्टेड नहीं हैं। परमिटेड टू ट्रेड (Permitted to Trade) व्यवस्था के तहत ऐसी सिक्योरिटीज NSE पर कारोबार कर सकती हैं, जबकि उनकी लिस्टिंग और डिस्क्लोजर से जुड़ी जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। NSE ने साल 2019 में अपने इंडेक्स एलिजिबिलिटी नियमों में बदलाव किया था, जिसके बाद ऐसी सिक्योरिटीज को भी कुछ शर्तों के तहत Nifty Indexes में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल करीब 250 ऐसी कंपनियां NSE के प्लेटफॉर्म पर इस कैटेगरी में कारोबार करती हैं।
अगर NSE को अपने शेयरों की ट्रेडिंग अपने प्लेटफॉर्म पर करने की मंजूरी मिलती है, तो निवेशकों को दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर NSE के शेयरों में कारोबार का विकल्प मिल सकता है। इससे शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी बढ़ सकती है। साथ ही भविष्य में NSE के शेयर को उसके ही प्रमुख इंडेक्स में शामिल करने की संभावना भी महत्वपूर्ण बन सकती है। हालांकि, इसके लिए इंडेक्स के सभी जरूरी मानदंडों को पूरा करना होगा।
NSE का IPO भी भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित अपकमिंग IPO में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, NSE को अपने ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के लिए अगस्त के अंत तक SEBI की मंजूरी मिलने की उम्मीद है और कंपनी सितंबर 2026 के दूसरे हिस्से में IPO लॉन्च करने का लक्ष्य रख रही है। अगर NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति हासिल कर लेता है, तो यह भारत के शेयर बाजार के इतिहास में एक बेहद अनोखी स्थिति होगी, क्योंकि एक्सचेंज खुद अपने प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों के कारोबार को सक्षम करेगा।
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