आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस नीति में टीवी रेटिंग सेवाएं प्रदान करने वाली एजेंसियों के पंजीकरण, संचालन, लेखा-परीक्षण एवं निगरानी के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए हैं।
टीवी रेटिंग नीति 2026, 16 जनवरी 2014 को जारी भारत में टीवी रेटिंग एजेंसियों के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों की जगह लाई गई है।
यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
नीति की प्रमुख विशेषताओं में प्रवेश नियमों को आसान बनाना और टीवी रेटिंग एजेंसी के रूप में पंजीकरण कराने की इच्छुक कंपनी के लिए ‘नेटवर्थ’ की आवश्यकता को मौजूदा 20 करोड़ रुपये से घटाकर पांच करोड़ रुपये करना शामिल है।
कड़े हित-संघर्ष विरोधी प्रावधानों के तहत तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि निदेशक मंडल के कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य स्वतंत्र निदेशक होंगे, जिनका प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं या विज्ञापन एजेंसियों से कोई संबंध नहीं होगा।
इसके अतिरिक्त एजेंसियों को ऐसी परामर्श सेवाएं देने से प्रतिबंधित किया गया है जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
नमूना (सैंपल) आकार बढ़ाने और प्रतिनिधि आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए एजेंसियों को 18 महीने के भीतर (मौजूदा रेटिंग एजेंसियों के लिए छह महीने) 80,000 मीटर लगे घरों तक अपने संचालन का विस्तार करना होगा और बाद में इसे बढ़ाकर 1,20,000 घरों तक पहुंचाना होगा, ताकि आंकड़ों की सटीकता में सुधार हो सके।
मापन प्रौद्योगिकी-निरपेक्ष होगा जिसमें केबल, डीटीएच, ओटीटी और कनेक्टेड टीवी सहित सभी माध्यमों से आंकड़े जुटाए जाएंगे तथा मीटर लगे घरों की सभी टीवी स्क्रीन से डेटा एकत्र किया जाएगा।
पारदर्शिता एवं गोपनीयता के लिए एजेंसियों को अपनी विस्तृत कार्यप्रणाली और गुमनाम किए गए डेटा को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा। साथ ही सभी संचालन को दर्शकों की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए डिजिटल व्यक्तिगत जानकारी संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 का सख्ती से पालन करना होगा।
जवाबदेही और लेखा-परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए अब दोहरी ऑडिट प्रणाली अनिवार्य की गई है, जिसमें तिमाही आंतरिक ऑडिट और वार्षिक स्वतंत्र बाहरी ऑडिट शामिल होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समय-समय पर ‘फील्ड’ निरीक्षण के लिए एक ऑडिट और निगरानी दल भी गठित करेगा।
शिकायत निवारण के लिए एजेंसियों को 10 दिन के भीतर शिकायतों के समाधान के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा और विवाद बढ़ने की स्थिति में एक अपीलीय प्राधिकरण भी स्थापित करना होगा।
‘लैंडिंग पेज’ से संबंधित प्रावधानों के तहत किसी ‘लैंडिंग पेज’ से उत्पन्न दर्शक संख्या को दर्शक मापन में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि ‘लैंडिंग पेज’ का उपयोग केवल विपणन उपकरण के रूप में किया जा सकता है।
प्रसारकों को यदि उनका चैनल किसी ‘लैंडिंग पेज’ पर उपलब्ध है तो इसकी जानकारी रेटिंग एजेंसी को देनी होगी।
टीवी रेटिंग के संदर्भ में ‘लैंडिंग पेज’ वह चैनल है जो सेट-टॉप बॉक्स चालू करते ही स्क्रीन पर अपने आप सबसे पहले दिखाई देता है।
अनुपालन और दंड से संबंधित प्रावधानों के अनुसार नियमों का उल्लंघन होने पर क्रमिक दंड लगाए जाएंगे, जिनमें अस्थायी रूप से रेटिंग निलंबित करने से लेकर बार-बार उल्लंघन होने पर पंजीकरण रद्द करना शामिल है।
डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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