चंद्रशेखरण (Chandrasekaran) ने अपने बयान में कहा था कि दोबारा नियुक्ति के लिए बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं था और ग्रुप (Group) में चल रही कई रणनीतिक परियोजनाओं को देखते हुए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उनके इस फैसले के बाद टाटा संस (Tata Sons) के अगले चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
चंद्रशेखरण (Chandrasekaran) के बयान के ठीक एक दिन बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) ने एक प्रस्ताव पारित कर जल्द से जल्द एक चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। इस समिति का काम टाटा संस (Tata Sons) के अगले चेयरमैन के नाम की सिफारिश करना होगा।
टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की ओर से कहा गया है कि वह नेतृत्व में सुचारू, समयबद्ध और व्यवस्थित बदलाव का समर्थन करेगा। टाटा ग्रुप (Tata Group) की नेतृत्व व्यवस्था में टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) और सर रतन टाटा ट्र्स्ट (Sir Ratan Tata Trust), टाटा संस (Tata Sons) के दो प्रमुख चैरिटेबल शेयरधारक हैं।
31 मार्च तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ट्रस्ट मिलकर टाटा संस (Tata Sons) में आधे से ज्यादा हिस्सेदारी रखते थे, जबकि कुल मिलाकर टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) की टाटा संस (Tata Sons) में करीब 66% हिस्सेदारी बताई जाती है। ऐसे में अगले चेयरमैन के चयन में ट्रस्ट (Trusts) की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।
नोएल टाटा (Noel Tata) का PMO और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मिलना भी इसी व्यापक नेतृत्व परिवर्तन प्रक्रिया के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन बैठकों में अगले चेयरमैन के नाम को लेकर कोई अंतिम फैसला हुआ है।
AGM पर भी संकट
टाटा ग्रुप (Tata Group) में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया के साथ एक अलग कॉरपोरेट और प्रक्रियात्मक चुनौती भी सामने है। टाटा संस (Tata Sons) की 18 अगस्त को होने वाली अनुअल जनरल मीटिंग (Annual General Meeting -AGM) पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में जरूरी कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में AGM को स्थगित किया जा सकता है। समस्या का संबंध सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) पर लागू नियामकीय प्रतिबंधों से है।
इन प्रतिबंधों के कारण ट्रस्ट (Trust) फिलहाल ट्रस्टी बैठक बुलाकर कुछ जरूरी फैसले नहीं ले पा रहा है। टाटा संस (Tata Sons) के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 86 के अनुसार, वैध AGM के लिए कम से कम 5 सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। इसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से नामित अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी भी आवश्यक बताई गई है।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिशनर (Charity Commissioner) के निर्देशों के कारण सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) फिलहाल ट्रस्टी बैठक बुलाने और निर्णय लेने से प्रतिबंधित है। इसी वजह से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह टाटा संस (Tata Sons) की AGM के लिए आवश्यक संयुक्त नामांकन नहीं कर सकता। रिपोर्टों के अनुसार, टाटा संस (Tata Sons) बैठक को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित करने की तैयारी कर रही है, लेकिन अगर आवश्यक कोरम उपलब्ध नहीं हुआ, तो AGM को स्थगित किया जा सकता है।
AGM के एजेंडे में वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों को मंजूरी देना, डिविडेंड की घोषणा और चंद्रशेखरण (Chandrasekaran) की रोटेशनल रिटायरमेंट के तहत निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्ति जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। चंद्रशेखरण (Chandrasekaran) का निदेशक के रूप में कार्यकाल और टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन के रूप में कार्यकाल अलग-अलग हैं। चेयरमैन के तौर पर उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है। इसलिए AGM में उनकी डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति से तत्काल चेयरमैन पद पर कोई बदलाव नहीं होता।
नोएल टाटा (Noel Tata) की सरकारी अधिकारियों से मुलाकात, चंद्रशेखरण (Chandrasekaran) का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला और नए चेयरमैन के चयन के लिए समिति बनाने की प्रक्रिया टाटा ग्रुप (Tata Group) के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत है। आने वाले महीनों में चयन समिति संभावित उम्मीदवारों पर विचार करेगी और टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगी। साथ ही 18 अगस्त की AGM से जुड़ा कोरम मुद्दा भी ग्रुप के लिए एक अलग चुनौती बना हुआ है। फिलहाल अगले चेयरमैन के नाम पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम से स्पष्ट है कि टाटा संस (Tata Sons) अब अगले नेतृत्व चरण की तैयारी में जुट गई है।
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