हमने इस SUV के नए मॉडल का लगभग 2000 किलोमीटर का ड्राइविंग टेस्ट किया। इस टेस्ट में अलग-अलग सड़कों पर इसकी परफॉर्मेंस और माइलेज की डिटेल भी सामने आई। ऐसे में आप भी इस SUV को खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तब आपको इस ड्राइविंग टेस्ट की डिटेल को जरूर पढ़ना चाहिए।
निसान मैग्नाइट ड्राइविंग टेस्ट
भोपाल-ग्वालियर-भोपाल (करीब 1100Km)
मैग्नाइट के साथ हमारे सफर की शुरुआत भोपाल से ग्वालियर के लिए हुई। इसके लिए हमने बिना टोल वाला रूट चुना। इस रूट से ग्वालियर का सफर लगभग 450KM का था। इस रूट से भोपाल के बाद विदिशा, सिरोज, कुरवई, मुंगावली, चंदेरी, पिछोर, दतिया, डबरा के बाद ग्वालियर आया। भोपाल से दतिया तक ये पूरा सिंगल रोड़ रूट था। बारिश की वजह से सड़क काफी खराब हो चुकी थी। साथ ही, ग्रामीण एरिया होने के चलते गायों और लोगों का ट्रैफिक भी काफी थी। सड़क पर अचानक से कई गड्ढे आ रहे थे। हालांकि, इन खराब सड़कों पर मैग्नाइट के सामने परफॉर्मेंस बड़ी चुनौती रही। कार में एलॉय व्हील होने से जब ये टायर गड्ढे में जाता तब कार के अंदर इसका अहसास होता। हालांकि, कार सड़क पर इतनी चिपककर चली कि सिंगल सड़क होने के बाद भी इसने सड़क को नहीं छोड़ा। लगभग 10 घंटे का नॉनस्टॉप सफर होने के बाद भी गाड़ी चलाने से थकान नहीं हुई। ग्वालियर से भोपाल लौटने के लिए शिवपुरी, गुना वाला NH 46 को यूज किया। लगभग 450Km लंबे इस रूट पर फोर लाइन होने से सफर आसान रहा, जिसे महज 6 घंटे में ही पूरा कर लिया गया। खास बात ये रही कि 120Km/h की रफ्तार पर भी कार सड़क पर बेहतर नजर आई। सड़क पर मैग्नाइट का ये अंदाज सेफ्टी का अहसास भी दे रहा था।
निसान मैग्नाइट ड्राइविंग टेस्ट
भोपाल-ओंकारेश्वर-उज्जैन-भोपाल (करीब 670Km)
अब बात करतें दे मैग्नाइट की सेकंड ट्रिप की। इस ट्रिप में भोपाल से ओंकारेश्वर के लिए जो रूट चुना उसमें सीहोर, आष्टा, सतवास, पुनासा और फिर ओंकारेश्वर आया। आष्टा के बाद इस रूट की खूबसूरती आपका मन मोह सकती है। हरे-भरे जंगल वाला ये रूट जिग-जैग वाले रास्तों से भरा था। यानी यहां पर कार की हैंडलिंग का टेस्ट हुआ। अचानक आने वाली अंधे मोड़ पर गाड़ी की स्पीड को कंट्रोल करना मजेदार रहा। इसमें मैग्नाइट ने भी अपना पूरा दम-खम दिखाया। इन टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर इस SUV के मिजाज काफी नर्म रहे। स्टीयरिंग की ग्रिप, हल्के इशारे से कार का घूम जाना… इन बातों में कार पूरी तरह खरी रही। ओंकारेश्वर से उज्जैन का सफर इंदौर और देवास वाले रूट से तय किया गया। यहां रास्ते में चोरल की घाटी पर लंबे जाम से ड्राइवर और कार दोनों के पेशेंस का टेस्ट हुआ। दरअसल, यहां के पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई के वक्त इतना लंबा जाम था कि महज 9 किलोमीटर का सफर 2 घंटे में तय हुआ। हालांकि, कार के हिल होल्ड और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर ने इस सफर को भी आसान बना दिया। वहीं, उज्जैन से भोपाल लौटने के दौरान 200 किलोमीटर का सफर सिर्फ 3 घंटे में ही तय हो गया।
निसान मैग्नाइट ड्राइविंग टेस्ट
भोपाल-नर्मदापुरम-भोपाल (करीब 170Km)
निसान मैग्नाइट से हमारा तीसरा लंबा सफर भोपाल से नर्मदापुरम का रहा। ये पूरा रूट NH46 पर रहा। ऐसे में ड्राइविंग काफी आसान रही। इस रूट पर पॉपुलर भीमबेटका भी गए। भीमबेटका मुख्य सड़क से लगभग 4 किलोमीटर अंदर था। ऐसे में छोटी सड़क होने के बाद भी कार की पोजीशन काफी जबरदस्त रही। सड़क से नीचे उतरने पर भी कार के अंदर किसी भी पैसेंजर को इस बात का अहसास नहीं होता कि सड़क पर कोई हलचल हुई है। वहीं, नर्मदापुरम के पॉपुलर सेठानी घाट तक कार आसानी से पहुंच गई। कहने को इस एरिया में दुकानों के चलते काफी भीड़ भाड़ रहती है। साथ ही, सड़क पर उतार-चढ़ाव भी रहे, लेकिन हिलहोल्ड फीचर की मदद से ये सफर काफी आरामदायक रहा। कुल मिलाकर मुश्किल सफर तय कर चुकी मैग्नाइट इस आसान सफर के दौरान बेहतर नजर आई।
इन फीचर्स ने सफर को आसान बनाया
>> निसान मैग्नाइट को हमने 9,658 Km से 11,594 Km तक दौड़ाया। यानी हमने कुल मिलाकर 1,936Km का सफर तय किया। लगभग 2000 Km के सफर के दौरान कार की खूबियां और खामियां दोनों सामने आईं। साथ ही, इस कार के कई ऐसे फीचर्स भी थे जिन्होंने सफर मजेदार और आसान बनाया। जैसे इस कार के टॉप मॉडल में आपको टिल्ट स्टीयरिंग और एडजेस्टेबल ड्राइवर सीट मिलती है। इन दोनों के कॉम्बिनेशन से ड्राइवर अपने हिसाब से स्टीयरिंग और सीट की हाइट को एडजेस्ट कर सकता है।
>> इसके अलावा, क्रूज कंट्रोल का फीचर हाईवे के सफर को आसान बनाता है। इससे आप चाहें तो बेहतर माइलेज भी निकाल सकते हैं। वहीं, घाटी के सफर के दौरान ट्रैक्शन कंट्रोल काफी मददगार रहा है। सभी फीचर के एक्टिव और डिएक्टिव होने की डिटेल MID पर मिलती है। कार में म्यूजिक सिस्टम भी शानदार मिलता है। कार में 360 डिग्री कैमरा मिलता है, जिससे कार बैक करने में आसानी हो जाती है। आप बिना देखे ही चारों तरफ की रियल टाइम एक्टिविटी डिस्प्ले पर देख सकते हैं।
>> अब बात करें इसकी खामियों की तो ड्राइविंग के दौरान कई बार इसके CVT (ऑटोमैटिक) ट्रांसमिशन हल्का अटकता, या यूं कहा जाए कि ये खिंच रहा था। साथ ही, ब्रेकिंग हल्की कमजोर नजर आई। इसके लिए आपको ब्रेक पैडल ज्यादा तेजी से काफी पुश करने पड़े। हाईवे पर ज्यादा स्पीड के दौरान ये एक बड़ी खामी भी महसूस रही। एक अन्य खामी कार की LED लाइट भी रही। वैसे तो इसकी रोशनी भरपूर है, लेकिन जब आपके सामने की तफ से दूसरी कोई कार LED लाइट वाली आती है, तब आपके सामने ब्लाइंट स्पॉट बन जाता है।
निसान मैग्नाइट का माइलेज
यहां आपको थोड़ी निराशा हाथ लगेगी। दरअसल, कंपनी के दावे के मुताबिक टर्बो इसके पेट्रोल CVT मॉडल हाईवे पर 18 Kmpl से ज्यादा का माइलेज देता है, लेकिन हमारे रियल माइलेज टेस्ट के दौरान ऐसा नहीं रहा। हाईवे पर इस कार ने 15 Kmpl से थोड़ा ज्यादा माइलेद दिया। जबकि शहर के अंदर ये माइलेज 10 Kmpl के आसपास का रहा। मैग्नाइट में 40 लीटर का फ्यूल टैंक मिलता है। जबकि 30 लीटर पेट्रोल में भी MID पर इसके सारे पॉइंट फुल नजर आते हैं। ऐसे में कार के अंदर कितना पेट्रोल है इसका अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आप ऐसे रास्ते पर जा रहे हैं जहां पेट्रोल पंप की संभावन कम है, तब कार में पेट्रोल डलवाकर ही निकलें।
अब बात करें हम अपने ओपिनियन की तो निसान मैग्नाइट भारत में मिलने वाली एक ऐसी कॉम्पैक्ट SUV है, जो एक मिडिल क्लास ग्राहक की हर जरूरत को पूरा करती है। कार की परफॉर्मेंस के सामने इसका माइलेज आप भूल जाएंगे। खासकर जब आपको महज 6,14,000 रुपए में ऐसी दमदार SUV मिल रही हो। इतना ही नहीं, मैग्नाइट को ग्लोबल NCAP में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। भारतीय बाजार में फीचर्स के हिसाब से ये अपनी कैटेगरी में रेनो काइगर, किआ सोनेट, हुंडई वेन्यू, मारुति ब्रेजा, महिंद्रा XUV 3XO जैसे मॉडल बहुत सस्ती है। कुल मिलाकर आप कम कीमत में एक फीचर्स पैक्ड SUV चाहते हैं, तब मैग्नाइट की तरफ देख सकते हैं।
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