नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने मार्च में हुए आम चुनाव के बाद सत्ता संभालने के बाद पहली बार देश की संसद को संबोधित किया। संसद के सामने अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ किया कि भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद को बातचीत, चर्चा और राजनयिक प्रयासों के माध्यम से हल किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पड़ोसी देश मिलकर इस मसले का सही रास्ता निकाल लेंगे।
लिपुलेख और कालापानी पर कूटनीतिक रुख
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर भारत के साथ जो क्षेत्रीय विवाद चल रहे हैं, उनका समाधान केवल टेबल टॉक से ही संभव है। उन्होंने जानकारी दी कि इस व्यापारिक मार्ग को लेकर नेपाल द्वारा भेजे गए कूटनीतिक नोट का नई दिल्ली ने जवाब भी दिया है।
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नेपाल की तरफ से भी अतिक्रमण का दावा
इस संबोधन के दौरान पीएम शाह ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने कहा कि मामले की समीक्षा से पता चला है कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने दोनों देशों के सर्वेक्षकों, इतिहासकारों और क्षेत्र विशेषज्ञों को एक साथ मिलकर इस दिशा में काम करने की सलाह दी।
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संसद के पहले संबोधन पर टिकी थीं नजरें
बता दें कि नेपाल में हुए ‘जेन-जी विद्रोह’ के बाद हुए चुनावों में बालेन शाह की पार्टी ने एकतरफा और बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद इस साल 27 मार्च को उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पद संभालने के बाद से वे न तो किसी विदेश यात्रा पर गए और न ही मीडिया से ज्यादा बातचीत की। ऐसे में उनके इस पहले संसदीय संबोधन से भारत को लेकर उनकी सरकार की विदेश नीति का रुख साफ हो गया है।
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