नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ के बाद मदद के लिए भारत और चीन को धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि हिमालय में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नेपाल, भारत और चीन को साथ आना होगा। शाह ने भोटेकोशी की बाढ़ को सिर्फ नेपाल की आपदा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जलवायु परिवर्तन की चेतावनी बताया। शाह ने कहा कि ग्लेशियर से आई इस बाढ़ ने सड़कें, पुल, स्कूल, घर और लोगों के काम-धंधे तबाह कर दिए। उन्होंने दुनिया से अपील की कि जलवायु आपदा से प्रभावित गरीब देशों को दोबारा खड़ा करने के लिए कर्ज नहीं, ग्रांट यानी ऐसी मदद दी जाए जिसे वापस न करना पड़े। भारत-चीन के साथ हिमालय के लिए साझा सिस्टम बनाने का प्रस्ताव शाह ने कहा कि हिमालय की निगरानी और आपदा से बचाव के लिए नेपाल, भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने एक साझा सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसमें: शाह ने कहा कि हिमालय को ऐसा क्षेत्र बनाना चाहिए जहां देश आपदा से जुड़ी जानकारी और विशेषज्ञता एक-दूसरे के साथ साझा करें। शाह बोले- भोटेकोशी की बाढ़ सिर्फ नेपाल की समस्या नहीं नेपाल PM ने कहा कि भोटेकोशी-त्रिशूली की आपदा को सिर्फ एक देश की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर पूरे हिमालयी क्षेत्र पर पड़ रहा है। शाह ने कहा, “यह सिर्फ नेपाल की निजी मुसीबत नहीं है। बांग्लादेश से पूछिए, भूटान से पूछिए, भारत से पूछिए, मालदीव से पूछिए, पाकिस्तान से पूछिए, श्रीलंका से पूछिए।” उन्होंने कहा कि इस आपदा से नेपाल के विकास का काम भी प्रभावित हुआ है। उनके मुताबिक, जलवायु आपदा अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि विकास और लोगों की जिंदगी से जुड़ा बड़ा संकट बन गई है। ग्लेशियर टूटने के बाद आई थी अचानक बाढ़ अगस्त के आखिर में नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके की सीमा के पास एक ग्लेशियर टूट गया था। इसके बाद भूस्खलन हुआ और अचानक बाढ़ आ गई। पानी और मलबे ने नीचे की घाटियों में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में कम से कम 1,450 लोगों की मौत हुई है। कई हफ्ते बाद भी राहत और लोगों की तलाश का काम जारी है। इलाके में 6,000 से ज्यादा लोग लापता हैं। शाह ने कहा कि इनमें से कई लोग शायद कभी नहीं मिल पाएंगे। शाह बोले- जंग के लिए सिस्टम मजबूत, खाना पहुंचाने में कमजोर नेपाल PM ने दुनिया की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हमने युद्ध के लिए बेहतरीन लॉजिस्टिक्स वाला सिस्टम बना लिया है, लेकिन भोजन पहुंचाने के लिए हमारी व्यवस्था कमजोर है।” उन्होंने कहा कि जब जलवायु आपदा किसी गरीब देश में सड़कें, पुल और घर तबाह कर देती है, तो उसे दोबारा खड़ा करने के लिए सिर्फ कर्ज देना सही तरीका नहीं है। नेपाल को GDP के 10% के बराबर मदद की जरूरत शाह के मुताबिक, इस आपदा के बाद नेपाल को सड़क, पुल, घर और दूसरी जरूरी चीजें दोबारा बनाने के लिए अपनी GDP के करीब 10% के बराबर मदद की जरूरत है। उन्होंने दुनिया से ग्रांट आधारित मदद देने की अपील की। उनका कहना है कि गरीब देशों को आपदा से उबरने के लिए नया कर्ज लेने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
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