उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और चीन के बीच लिपुलेख व्यापार मार्ग को फिर से खोलने पर हुए समझौते के बाद नेपाल-भारत सीमा विवाद बढ़ गया है। नेपाल लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना क्षेत्र बताता है, जबकि भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उसके हैं। खनाल ने कहा, ‘‘नेपाल सरकार के पास इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है कि हमारे पास संधि के आधिकारिक दस्तावेज हैं या नहीं।
कुछ रिकॉर्ड हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ संधियों से संबंधित दस्तावेज राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखे गए हैं। लेकिन हमें स्पष्ट जानकारी नहीं है कि वे वास्तविक आधिकारिक संधियां हैं या नहीं।’’
हालांकि, उन्होंने कहा कि नेपाल के पास 1816 की संधि और 1950 की संधियों से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। सुगौली संधि नेपाल और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई थी, जिसने बड़े पैमाने पर नेपाल की क्षेत्रीय सीमाओं और ब्रिटिश भारत के साथ उसके संबंधों को निर्धारित किया था।
इसी तरह, नेपाल और भारत के बीच 1950 में हुई शांति एवं मैत्री संधि में दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के देशों में कई क्षेत्रों में समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया था।
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