सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया का विस्तृत विवरण हलफनामे (एफिडेविट) के माध्यम से अदालत के रिकॉर्ड में जमा करना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार तक टाली सुनवाई
सरकार का कहना है कि इन सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी अदालत के समक्ष रखने से यह भी स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने के लिए किस तरह की कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई गुरुवार या शुक्रवार तक टाल दी जाए, ताकि केंद्र सरकार अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल कर सके। उन्होंने बताया कि सरकार सोमवार (आज) ही यह हलफनामा अदालत में जमा कर देगी, जिसमें नीट परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का विवरण होगा। केंद्र के इस अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह भी इस पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझना चाहती है। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
CBT मोड पर टास्क फोर्स की सिफारिशों पर भी रहेगी नजर
इससे पहले 27 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह यह भी देखेगी कि केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स ने नीट परीक्षा के आयोजन को लेकर क्या सिफारिशें दी हैं। खास तौर पर अदालत यह जानना चाहती है कि टास्क फोर्स ने मौजूदा ऑफलाइन (पेन-पेपर) परीक्षा की जगह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) लागू करने के संबंध में क्या सुझाव दिए हैं। इस मामले में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA), राजद सांसद सुधाकर सिंह और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल टास्क फोर्स
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की थी। इस समिति की अध्यक्षता नंदन नीलेकणि कर रहे हैं, जिन्हें प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) के क्षेत्र का विशेषज्ञ माना जाता है। मेहता ने बताया कि इस उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स में नंदन नीलेकणि के अलावा कई अनुभवी सदस्य शामिल हैं। इनमें पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। समिति का उद्देश्य नीट परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।
राधाकृष्णन समिति को सौंपा गया था सुधार का जिम्मा
वहीं, 24 जून को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह नीट परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर लगातार नजर रखेगा। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि वर्षों से तात्कालिक (Ad hoc) तरीके से फैसले लेने की वजह से कई समस्याएं पैदा हुई हैं, इसलिए अब स्थायी और प्रभावी सुधार जरूरी हैं। यह टिप्पणी फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने और आईआईटी की परीक्षा प्रणाली की तर्ज पर सुधार लागू करने के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं। नीट-यूजी पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति को परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा को मजबूत करने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की संरचना व कार्यप्रणाली में बदलाव के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
मामले में दायर एक याचिका में यह मांग भी की गई है कि NEET-UG आयोजित करने वाली NTA का पुनर्गठन किया जाए या उसकी जगह एक अधिक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जाए, ताकि मेडिकल प्रवेश परीक्षा निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से आयोजित हो सके।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करेगी, जिसमें ऐसे सुधार शामिल होंगे जो राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों से भी आगे हो सकते हैं। मेहता ने कहा, “छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों से आगे बढ़कर काम कर रही है और पूरे मामले की निगरानी सर्वोच्च स्तर पर की जा रही है।”
इससे पहले 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि NEET-UG में पेपर लीक जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान तब तक संभव नहीं है, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती। उस समय भी तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी तरह की कोई कमी न रह जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि डॉ. के. राधाकृष्णन ने अदालत में एक हलफनामा दाखिल कर समिति की सिफारिशों को लागू करने की प्रगति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी दी है।
पेपर लीक के बाद रद्द हुई थी NEET-UG 2026 परीक्षा
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। पेपर लीक के आरोपों की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। इससे पहले 2024 के NEET-UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि किस परिस्थिति में किसी सार्वजनिक परीक्षा को रद्द किया जा सकता है, इसके लिए स्पष्ट मानदंड तय किए जाने चाहिए।
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