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हालांकि कुछ सांसदों ने संकेत दिया है कि प्रस्तावित बैठक एक शिष्टाचार मुलाकात हो सकती है, लेकिन संसद में चल रही गतिविधियों और आने वाले विधायी एजेंडे के बीच इसके समय का राजनीतिक महत्व है। खासकर, परिसीमन बिल पर चर्चा में प्रमुखता से बात हो सकती है। NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने पहले संकेत दिया था कि अगर प्रस्तावित बदलावों से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में एक समान बढ़ोतरी होती है, तो पार्टी परिसीमन की प्रक्रिया का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।
मीडिया से बात करते हुए सुले ने कहा कि अगर बिल में देश भर में लोकसभा सीटों की संख्या में 50% बढ़ोतरी का प्रावधान हो, तो पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि, सुले ने स्पष्ट किया था कि NCP (SP) प्रस्तावित कानून का अंतिम मसौदा सार्वजनिक होने के बाद ही इस पर कोई औपचारिक रुख अपनाएगी।
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परिसीमन की प्रक्रिया एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गई है, खासकर इस चिंता के कारण कि लोकसभा सीटों के आवंटन में बदलाव से अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसलिए, सुले द्वारा सुझाया गया सीटों में एक समान बढ़ोतरी का विचार, प्रस्तावित कानून पर पार्टी के रुख के लिए अहम हो सकता है।
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