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अमेजन ने मंगलवार को अपनी क्लाउड सर्विस को नाटो के सभी 32 सदस्य देशों के लिए उपलब्ध करा दिया है। इस पहल का मकसद सदस्य देशों के बीच संवेदनशील सरकारी और रक्षा दस्तावेजों को आसानी से शेयर करने और सैन्य योजना पर मिलकर काम करने की सुविधा देना है। इससे डेटा लीक नहीं होगा और सूचनाएं शेयर करना सेफ रहेगा।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सेना के क्लाउड कंप्यूटिंग सिस्टम में अमेजन की पहले से बड़ी भूमिका रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर खुफिया एनालिसिस, सैन्य लॉजिस्टिक्स और डिफेंस प्लानिंग के लिए सिक्योर क्लाउड फैसिलिटी एक प्राथमिक जरूरत है।

इंटेलिजेंस शेयरिंग की चुनौती दूर होगी
अब तक नाटो देशों में अलग-अलग सुरक्षा मानकों यानी नियमों के कारण खुफिया जानकारी शेयर करने में काफी दिक्कत आती थी। हालांकि, अब सभी 32 देशों के लिए अप्रूव्ड कॉमर्शियल क्लाउड सॉल्यूशन का इस्तेमाल करने से समय के साथ सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करना और मिलकर प्लान बनाना आसान हो जाएगा।
इस नए सिस्टम के तहत सभी सहयोगी देश नाटो की कुछ गोपनीय जानकारियों को आपस में शेयर कर सकते हैं। हालांकि, यह सिर्फ नाटो रिस्ट्रिक्टेड लेवल की जानकारियां होंगी, जो नाटो की सबसे कम गुप्त या सबसे लो-लेवल की जानकारियां होती हैं।


फिलहाल टॉप-सीक्रेट डेटा शेयर नहीं होगा
नाटो के बड़े और गोपनीय मिलिट्री ऑपरेशंस की प्लानिंग बेहद सुरक्षित स्तर (‘सीक्रेट’ और ‘टॉप-सीक्रेट’) पर बनती है। इतने संवेदनशील कामों के लिए इंटरनेट या क्लाउड सर्विसेज का तुरंत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।
हालांकि, अमेजन का कहना है कि अब नाटो के सभी 32 सदस्य देशों ने सबसे बुनियादी सुरक्षा स्तर पर इसकी क्लाउड सर्विसेज को हरी झंडी दी है। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में सदस्य देशों की सेनाओं के लिए अपनी ज्यादा सीक्रेट और संवेदनशील जानकारियों को भी क्लाउड पर सुरक्षित तरीके से रखना आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
क्या है NATO और इसकी डेटा सुरक्षा की चुनौती?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO): यह 32 पश्चिमी देशों का एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी।
डेटा शेयरिंग की दिक्कत: सभी 32 देशों के अपने-अपने सुरक्षा और आईटी स्टैंडर्ड्स यानी नियम हैं। किसी एक देश का डेटा सिस्टम दूसरे देश के सिस्टम से सीधे बात नहीं कर पाता था, जिससे आपात स्थिति में फैसले लेने में देरी होती थी।
कॉमर्शियल क्लाउड का फायदा: टेक कंपनियों जैसे- AWS का इस्तेमाल करने से सभी देशों को अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाना पड़ेगा और एक ही कॉमन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित तरीके से फाइलें शेयर हो सकेंगी।
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