देखा जाए तो नई दिल्ली की यह बहुप्रतीक्षित क्वाड (Quad) बैठक यह बताती है कि आने वाले दशक में वैश्विक राजनीति का केंद्र यूरोप से हटकर इंडो-पैसिफिक बनने जा रहा है, और इस नई भू-राजनीतिक व्यवस्था में भारत केवल सहभागी नहीं, बल्कि निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है। इसका सारा श्रेय मोदी प्रशासन और आरएसएस के प्रति समर्पित बुद्धिजीवियों को जाता है, जिन्होंने अपनी सधी हुई रणनीति का वैश्विक कमाल दिखा दिया।
इसे भी पढ़ें: दिल्ली से चीन को मिली सीधी चुनौती, Quad ने हिंद प्रशांत में खींची नई रणनीतिक लकीर
आइए सबसे पहले समझते हैं कि क्वाड क्या है? तो यह जान लीजिए कि Quadrilateral Security Dialogue यानी Quad चार लोकतांत्रिक देशों- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया- का रणनीतिक समूह है, जिसका मुख्य उद्देश्य “फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक” को सुरक्षित रखना है।
# क्वाड देशों के विदेशमंत्रियों की नई दिल्ली बैठक से निकले राष्ट्रीय मायने निम्नलिखित हैं:-
पहला, भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत: दिल्ली में बैठक आयोजित होना यह दिखाता है कि India अब इंडो-पैसिफिक राजनीति का केंद्रीय खिलाड़ी बन चुका है। भारत, अमेरिका और पश्चिम के लिए संतुलित साझेदार है। वैश्विक दक्षिण (Global South) और पश्चिमी शक्तियों के बीच “सेतु” की भूमिका निभा रहा है। चीन के मुकाबले लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में उभर रहा है।
दूसरा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लाभ: Quad की समुद्री निगरानी पहल भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हिंद महासागर में भारतीय निगरानी क्षमता बढ़ेगी। चीन की नौसैनिक गतिविधियों पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। भारतीय नौसेना को तकनीकी सहयोग मिलेगा।
तीसरा, आर्थिक और तकनीकी अवसर: क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सहयोग से भारत को: नई निवेश संभावनाएँ, सप्लाई चेन हब बनने का मौका, मैन्युफैक्चरिंग विस्तार, और हाई-टेक उद्योगों में बढ़त मिल सकती है।
चौथा, आतंकवाद पर भारत की चिंता को समर्थन: बैठक में आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद की निंदा की गई, जिसमें पहलगाम हमले का भी उल्लेख हुआ। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन है, विशेषकर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर, और वैश्विक मंचों पर भारत की सुरक्षा चिंताओं को वैधता देने में।
पांचवां, भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा: हाल के समय में टैरिफ और रणनीतिक मतभेदों के बावजूद बैठक ने दिखाया कि Quad ढांचा अभी भी मजबूत है। इससे संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका दोनों चीन को लेकर दीर्घकालिक सहयोग चाहते हैं। Quad व्यक्तिगत नेताओं से ऊपर उठकर संस्थागत रूप ले रहा है।
# वहीं, क्वाड देशों के विदेशमंत्रियों की हालिया हुई बैठक के अंतरराष्ट्रीय मायने निम्नलिखित हैं-
पहला, चीन को सामरिक संदेश: बैठक का सबसे बड़ा संकेत चीन के लिए था। संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में “बलपूर्वक यथास्थिति बदलने” पर चिंता जताई गई। इसका अर्थ हुआ कि चीन की समुद्री सैन्य गतिविधियों पर निगरानी बढ़ेगी।इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश तेज होगी। Quad अब केवल “संवाद मंच” नहीं बल्कि “रणनीतिक समन्वय मंच” बनता दिख रहा है।
दूसरा, इंडो-पैसिफिक में नई भू-राजनीतिक धुरी: Quad देशों ने समुद्री निगरानी, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सुरक्षा पर नई पहलें शुरू कीं। फिजी में संयुक्त पोर्ट परियोजना इसकी मिसाल है। इससे प्रशांत द्वीपीय देशों में चीन का प्रभाव संतुलित करने की कोशिश होगी। हिंद महासागर से प्रशांत महासागर तक नई रणनीतिक कनेक्टिविटी बनेगी। छोटे देशों को “चीनी कर्ज कूटनीति” का विकल्प मिलेगा।
तीसरा, सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स की राजनीति Quad ने क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा सुरक्षा पर नया फ्रेमवर्क बनाया। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि: चीन रेयर अर्थ मिनरल्स में वैश्विक प्रभुत्व रखता है। सेमीकंडक्टर, रक्षा और AI उद्योग इन खनिजों पर निर्भर हैं। भारत, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका मिलकर चीन-निर्भरता कम करना चाहते हैं।
चौथा, पश्चिम एशिया संकट और समुद्री व्यापार: बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी की सुरक्षा पर विशेष चर्चा हुई। इसके मायने ये हुए कि ईरान-इजरायल तनाव का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। क्वाड (Quad) वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है। ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश है।
पांचवां, “एशियाई नैटो” की बहस तेज: चीन लगातार क्वाड (Quad) को “ब्लॉक राजनीति” कहता रहा है। हालांकि क्वाड (Quad) खुद को नैटो (NATO) नहीं मानता, लेकिन सैन्य सहयोग बढ़ रहा है। समुद्री निगरानी और तकनीकी साझेदारी गहरी हो रही है। साझा सुरक्षा सोच विकसित हो रही है।
सच कहूं तो नई दिल्ली की यह क्वाड (Quad) बैठक बताती है कि आने वाले दशक में वैश्विक राजनीति का केंद्र यूरोप से हटकर इंडो-पैसिफिक बनने जा रहा है। और इस नई भू-राजनीतिक व्यवस्था में भारत केवल सहभागी नहीं, बल्कि निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
– कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.