हम आपको बता दें कि अशोक खरात मर्चेंट नेवी में काम कर चुका है और उसे लोग कैप्टन के नाम से भी जानते थे। सेवानिवृत्ति के बाद उसने खुद को अंक गणना और तंत्र मंत्र का जानकार बताकर एक नई पहचान बनाई। नासिक के मिरगांव में उसने शिवनिका संस्थान और ईशान्येश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। धीरे धीरे उसने अपनी छवि एक ऐसे व्यक्ति की बना ली जो लोगों की शादी, संतान, व्यापार और पारिवारिक समस्याएं हल कर सकता है। गांव वालों के अनुसार, पिछले 15 से 16 साल में उसने 50 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी और एक भव्य फार्महाउस बनाया, जिसकी कीमत लगभग 18 करोड रुपये बताई जाती है। उसके दरबार में बड़े अधिकारी, राजनेता और उद्योगपति तक पहुंचते थे। अपॉइंटमेंट के लिए हजारों रुपये देने पड़ते थे और महीनों तक इंतजार करना पड़ता था।
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जांच में सामने आया है कि अशोक खरात लोगों के मन में डर और अंधविश्वास पैदा करता था। मंदिर में नकली सांप और जंगली जानवर रखकर रहस्यमय माहौल बनाया जाता था। महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जाता था। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके जीवन की समस्याएं केवल विशेष अनुष्ठान से ही खत्म हो सकती हैं। कई पीड़ित महिलाओं ने बताया कि उन्हें धमकाया जाता था कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उनके पति या बच्चों के साथ अनहोनी हो जाएगी। यही डर उन्हें चुप रहने पर मजबूर करता रहा।
पुलिस को जांच के दौरान एक पेन ड्राइव मिली जिसमें 58 अश्लील वीडियो क्लिप मिले। विशेष जांच टीम को अब तक 100 से ज्यादा संदिग्ध वीडियो के संकेत मिले हैं। आरोप है कि खरात अपने ऑफिस में लगे कैमरों के जरिए महिलाओं के वीडियो रिकॉर्ड करता था और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करता था। एक महिला ने आरोप लगाया कि शादी और वैवाहिक जीवन सुधारने के नाम पर उसे कई बार बुलाया गया और बार बार उसके साथ दुराचार किया गया।
दूसरी ओर, एक कर्मचारी ने शिकायत की कि उसकी गर्भवती पत्नी के साथ ‘स्वस्थ बच्चे’ के नाम पर अनुष्ठान करते समय अश्लील हरकत की गई, जिसके बाद वह महीनों तक अवसाद में रही। हम आपको बता दें कि इस पूरे मामले का खुलासा एक कर्मचारी द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन से हुआ। अपनी पत्नी के साथ हुई घटना से आहत होकर उसने ऑफिस में छुपा कैमरा लगाया, जिससे अशोक खरात की करतूतें सामने आईं। 21 मार्च को दर्ज प्राथमिकी के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जिसमें यौन शोषण, धोखाधड़ी और काले जादू विरोधी कानून शामिल हैं।
हम आपको बता दें कि अब तक अशोक खरात के खिलाफ 10 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश यौन शोषण से जुड़े हैं। पिछले कुछ दिनों में विशेष जांच टीम को 50 से ज्यादा फोन कॉल मिली हैं, जिनमें लोगों ने उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं। एक महिला ने बताया कि उसे तांबे के बर्तन से पानी पिलाया गया, जिसके बाद वह असहज महसूस करने लगी और उसी दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया। एक व्यापारी ने आरोप लगाया कि उसे व्यापार में लाभ दिलाने के नाम पर 2.62 लाख रुपये की ठगी की गई। बाद में पता चला कि जो पत्थर उसे दिए गए थे उनकी कीमत मात्र पांच हजार रुपये थी।
इस पूरे मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह पहलू यह भी सामने आया है कि अशोक खरात कथित तौर पर ‘योनि शुद्धिकरण’ जैसे झूठे और अंधविश्वासी अनुष्ठानों का सहारा लेकर महिलाओं का शोषण करता था। शिकायतों के अनुसार, वह महिलाओं को यह विश्वास दिलाता था कि उनके वैवाहिक जीवन, संतान सुख या पारिवारिक समस्याओं का समाधान इस विशेष ‘शुद्धिकरण’ प्रक्रिया से ही संभव है। इसके लिए वह महिलाओं को अकेले कमरे में बुलाता, उनके पतियों या परिजनों को बाहर भेज देता और फिर इस तथाकथित धार्मिक प्रक्रिया के नाम पर उनके साथ दुराचार करता था। कई पीड़िताओं ने बताया कि इस दौरान उन्हें मानसिक रूप से भ्रमित किया जाता, डराया जाता और यह कहा जाता कि यदि उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उनके परिवार पर अनहोनी हो जाएगी। इस तरह अंधविश्वास और भय का जाल बुनकर वह लंबे समय तक अपने अपराधों को छुपाता रहा।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह अशोक खरात के पैर धोती दिखीं। बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने 20 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह वीडियो कई साल पुराना है, लेकिन मौजूदा घटनाओं से वह खुद भी स्तब्ध हैं। उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस्तीफा जरूरी था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मिरगांव में आज भी लोग इस मामले पर खुलकर बात करने से डरते हैं। कई लोगों ने कहा कि अगर अशोक खरात जेल से बाहर आया तो वह उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। गांव के लोगों का आरोप है कि उसने नदी के किनारे अवैध निर्माण किया और स्थानीय लोगों की जमीन पर कब्जा किया। कुछ परिवारों को अपना गांव तक छोड़ना पड़ा।
हम आपको यह भी बता दें कि जांच के दौरान पुलिस को एक रिवॉल्वर, 21 जिंदा कारतूस और 5 इस्तेमाल किए गए कारतूस भी मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनका उपयोग मानव बलि जैसे कृत्यों में हुआ हो सकता है। बताया जा रहा है कि अशोक खरात की कुल संपत्ति 40 करोड रुपये से अधिक है।
देखा जाये तो इस मामले ने महाराष्ट्र में अंधविश्वास विरोधी कानून के कमजोर क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून तो है, लेकिन उसका पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा। इस बीच, नासिक की अदालत ने अशोक खरात की पुलिस हिरासत 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है। जांच अभी जारी है और संभावना है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है। विशेष जांच टीम अब उसके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे।
बहरहाल, अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक मानसिकता को उजागर करता है जहां अंधविश्वास, डर और सत्ता का गठजोड़ समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाता है। यह घटना एक चेतावनी है कि आंख मूंदकर किसी भी तथाकथित धर्मगुरु पर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में पीड़ितों को न्याय मिलेगा और क्या भविष्य में ऐसे ढोंगियों पर प्रभावी रोक लग पाएगी।
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