वैश्विक संकट और गवर्नर की चेतावनी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले ही संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तथा प्रमुख व्यापार मार्गों और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत अधिक अनिश्चितता की गिरफ्त में है। बाजार में उतार-चढ़ाव और कारोबारी माहौल में सतर्कता के कारण RBI को सतर्क रुख अपनाना पड़ रहा है, हालांकि, भारत की घरेलू विकास दर काफी मजबूत बनी हुई है। उनका मानना है कि इन बाहरी झटकों का मुकाबला करने के लिए लचीली नीति ही सही रास्ता है।
ब्रोकरेज फर्मों की क्या राय है?
ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल के अनुसार, MPC इस बार भी दरों और रुख में कोई बदलाव नहीं करेगा, बल्कि ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाएगा। उन्होंने बताया कि RBI ने एफसीएनआर-प्रेरित तरलता को ऑफसेट करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन सरकारी कैश बैलेंस अधिक होने के कारण कोर लिक्विडेशन अभी भी लगभग 5.4 लाख करोड़ रुपये पर बनी है। यह दूसरी तिमाही में चरम पर पहुंच सकती है और बाद में सामान्य हो जाएगी।
बाजार की निगाहें कहाँ होंगी?
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव का कहना है कि हालांकि कई वैश्विक केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के दबाव के चलते सतर्क हो गए हैं, लेकिन RBI घरेलू स्थितियों को प्राथमिकता देते हुए विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखेगा।
उनके अनुसार, बाजार को नीतिगत फैसले से अधिक गवर्नर के भाषण पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उसी से भविष्य की दिशा का पता चलेगा। अगर मुद्रास्फीति लगातार बढ़ती रही, तो वित्त वर्ष 2027 के अंत में दर बढ़ोतरी की आशंका बन सकती है, लेकिन अगर विकास स्थिर रहता है और मुद्रास्फीति नरम होती है, तो RBI अपनी पॉज को लंबा खींच सकता है।
कहां और कैसे देखें?
गवर्नर का नीतिगत बयान और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस RBI के आधिकारिक YouTube चैनल पर सुबह 10 बजे से लाइव प्रसारित होगी। इसके अलावा, लाइव हिन्दुस्तान वेबसाइट पर भी लाइव अपडेट और विश्लेषण उपलब्ध रहेगा।
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