सबसे प्रमुख निर्णय रेलवे क्षेत्र से जुड़ा है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लगभग 24815 करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में गाजियाबाद से सीतापुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन तथा राजमहेंद्रवरम से विशाखापत्तनम तक तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 601 किलोमीटर है और इनके तहत ट्रैक की कुल लंबाई 1317 किलोमीटर होगी।
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इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, भीड़भाड़ कम करना और माल तथा यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाना है। इससे संचालन क्षमता में सुधार होगा और सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। यह पहल प्रधानमंत्री के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिससे क्षेत्रीय विकास के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
गाजियाबाद से सीतापुर परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिल्ली से पूर्वोत्तर क्षेत्र को जोड़ने वाले उच्च घनत्व नेटवर्क का हिस्सा है। वर्तमान में इस मार्ग की क्षमता उपयोग 168 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो भविष्य में 207 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली और सीतापुर को लाभ मिलेगा। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी।
दूसरी ओर, राजमहेंद्रवरम से विशाखापत्तनम परियोजना पूर्वी तट के महत्वपूर्ण रेल गलियारे का हिस्सा है। यह मार्ग बंदरगाहों से जुड़ा हुआ है और माल ढुलाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यहां भी क्षमता का उपयोग 130 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस परियोजना के तहत गोदावरी नदी पर पुल, वायाडक्ट और बाईपास जैसी संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिससे संचालन और अधिक कुशल होगा।
दोनों परियोजनाओं से कोयला, अनाज, उर्वरक, सीमेंट और इस्पात जैसे सामानों की ढुलाई में तेजी आएगी। साथ ही पर्यावरण को भी लाभ होगा, क्योंकि रेल परिवहन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। अनुमान है कि इन परियोजनाओं से कुल 180 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी होगी, जो करोड़ों पेड़ लगाने के बराबर है।
हम आपको बता दें कि रेलवे के क्षेत्र में सरकार का जोर लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 26-27 के लिए रेलवे को रिकॉर्ड 265000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। देश में 1600 से अधिक इंजन बनाए जा रहे हैं और भारत वैश्विक स्तर पर प्रमुख माल परिवहन देशों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इसके अलावा, ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण सड़कों को कृषि बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों से जोड़ा जाएगा। योजना का कुल व्यय बढ़ाकर 83977 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार, रोजगार और आय में वृद्धि होगी तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। सरकार ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगी। इससे लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनधारकों को लाभ मिलेगा। इस निर्णय से सरकारी खजाने पर लगभग 6791 करोड़ रुपये का वार्षिक भार आएगा।
इसके अलावा समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिए भारत समुद्री बीमा पूल की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। इसके लिए 12980 करोड़ रुपये की संप्रभु गारंटी दी जाएगी। यह पहल वैश्विक अस्थिरता और भू राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय जहाजों और माल के लिए बीमा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इससे विदेशी बीमा पर निर्भरता कम होगी और देश की आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, मंत्रिमंडल के ये फैसले बुनियादी ढांचे के विस्तार, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यापक कदम हैं, जो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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