देखा जाये तो यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड टूटने भर की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में आए एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक भी है। नरेंद्र मोदी ने सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड नहीं तोड़ा है बल्कि उस राजनीतिक सोच को भी चुनौती दी है जिसमें लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि सत्ता पर केवल एक ही परिवार या एक ही दल का स्वाभाविक अधिकार है। दशकों तक देश की राजनीति गांधी परिवार और कांग्रेस पर केंद्रित रही, लेकिन एक गरीब परिवार से निकले, संघर्षों के बीच पले-बढ़े और कभी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र की ताकत के बल पर देश की सर्वोच्च सत्ता तक पहुंचकर भारतीय राजनीति की दिशा ही बदल दी।
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मोदी का यह सफर करोड़ों सामान्य भारतीयों के लिए प्रेरणा का विषय है। यह संदेश देता है कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है, और जनता जब ठान ले तो वह किसी भी स्थापित राजनीतिक समीकरण को बदल सकती है। लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता संभालते हुए और सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड बनाकर नरेंद्र मोदी ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट विजन और जनता के भरोसे के दम पर भारतीय राजनीति में असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
देखा जाये तो मोदी ने जो रिकॉर्ड बनाया है वह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उस जनविश्वास की कहानी है जिसने नरेंद्र मोदी को लगातार तीन बार देश की सत्ता सौंपी। आजादी के बाद केवल जवाहरलाल नेहरू ही ऐसे नेता थे जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई थी। नरेंद्र मोदी ने भी वही करिश्मा दोहराया, लेकिन उससे आगे जाकर लोकतांत्रिक राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया।
26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और निर्णायक नेता बनकर उभरेंगे। 2019 में उन्होंने पहले से भी अधिक प्रचंड जनादेश हासिल किया और दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। 2024 के चुनाव में भले भारतीय जनता पार्टी अकेले दम पर बहुमत के आंकड़े से नीचे रही, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की चमक और प्रभाव जरा भी कम नहीं हुआ। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने फिर सत्ता संभाली और मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।
दरअसल नरेंद्र मोदी का यह सफर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने लंबे समय तक प्रशासन संभालते हुए सुशासन का एक अलग मॉडल प्रस्तुत किया। अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 4610 दिनों तक राज्य की कमान संभाली। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में मिलाकर मोदी अब नौ हजार दिनों से अधिक समय तक किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख रह चुके हैं। मार्च 2026 में उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का 8930 दिनों का रिकार्ड भी तोड़ दिया था और देश के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले निर्वाचित प्रमुख बन गए थे।
उधर, मोदी के इस ऐतिहासिक मुकाम पर केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से उन्हें बधाइयों का सिलसिला मिला। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए भारत और इटली के मजबूत होते रिश्तों का उल्लेख किया। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने इसे दशकों की समर्पित जनसेवा और नेतृत्व का प्रमाण बताया। अमेरिकी सीनेटर जॉन कोर्निन ने मोदी के कार्यकाल को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि 140 करोड़ लोगों के विश्वास ने उन्हें यह मुकाम दिलाया है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना और करोड़ों लोग गरीबी से बाहर निकले।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी मोदी की उपलब्धि को भारत की समृद्धि, विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़ा। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने भी प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को समर्पण, संघर्ष और जनसेवा का प्रतीक बताया। यह साफ संकेत है कि आज नरेंद्र मोदी केवल भारत के नेता नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं।
उधर, देश के भीतर भी मोदी की इस उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल है। भाजपा नेताओं ने आज देशभर के विभिन्न धर्म स्थलों में प्रार्थना कर भारत की खुशहाली और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का संकल्प पूरा होने की कामना की। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में मोदी सरकार की उपलब्धियों की प्रशंसा की।
इसके अलावा, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की गयी और एक अभिनंदन प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस बैठक में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। यह बैठक सत्तारुढ़ एनडीए की ओर से शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है। बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभिनंदन का प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए एनडीए नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की।
बहरहाल, नरेंद्र मोदी की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि उन्होंने खुद को केवल एक नेता नहीं, बल्कि बदलाव के प्रतीक के रूप में स्थापित किया है। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाला यह सफर आज करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा बन चुका है। यही कारण है कि जब देश की राजनीति में असंभव को संभव करने की बात होती है, तब एक ही आवाज सबसे ज्यादा गूंजती है— मोदी हैं तो मुमकिन है।
-नीरज कुमार दुबे
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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