उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में किताबों के वितरण पर निगरानी रखने के लिए मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई है। राज्य भर के बच्चों को समय पर किताबें मिल सकेंगी।
जानिए कैसे काम करेगा यह नया मोबाइल ऐप
QR कोड से होगी पहचान: प्रिंटिंग प्रेस और पब्लिशर्स द्वारा तैयार किए गए किताबों के बंडलों पर विशेष क्यूआर (QR) कोड या बारकोड लगाए जाएंगे।
सप्लाई चैन पर निगरानी: जब किताबें पब्लिशर के गोदाम से निकलकर ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) पर पहुंचेंगी, तो वहां मौजूद अधिकारी ऐप के जरिए बंडल को स्कैन करके रिसीव करेंगे।
शिक्षकों द्वारा वेरिफिकेशन: ब्लॉक लेवल से जब किताबें ग्राम लेवल के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भेजी जाएंगी, तो स्कूल के प्रधानाध्यापक अपने मोबाइल ऐप से पुस्तकों का वेरिफिकेशन करेंगे।
छात्रों को डायरेक्ट वितरण: स्कूल में किस बच्चे को किस विषय की कौन सी किताब दी गई है, इसकी डिटेल्स भी डिजिटल पोर्टल और ऐप पर अपडेट किया जाएगा।
पूरे प्रदेश के लाखों छात्रों को मिलेगा सीधा फायदा
इस डिजिटल सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ पारदर्शी वितरण व्यवस्था है। पहले कई बार शिकायतें मिलती थीं कि डिपो या ब्लॉक स्तर पर किताबें रखी रह जाती थीं और बच्चों तक समय पर नहीं पहुंच पाती थीं।अब नया मोबाइल ऐप शुरू हो जाने के बाद राज्य स्तर के बड़े अधिकारी लखनऊ में बैठकर भी यह देख सकेंगे कि प्रदेश के किसी भी दूरदराज गांव के स्कूल में किस छात्र को किताबें मिली हैं और कहां अभी वितरण बाकी है।
छात्रों के लिए क्यों है यह खास?
समय पर मिलेगी किताब: नया सत्र शुरू होते ही छात्रों के हाथों में नई और रंग-बिरंगी किताबें होंगी, जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान नहीं होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: किसी भी लेवल पर किताबों की देरी या गड़बड़ी होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी जवाबदेही तय होगी।
डिजिटल पढ़ाई को बढ़ावा: इस पहल से प्राथमिक शिक्षा में डिजिटल तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा, जिससे सरकारी स्कूलों का स्तर और बेहतर होगा। शिक्षा विभाग की इस नई ऐप-बेस्ड पहल से उत्तर प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य और उज्ज्वल होगा और वे बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।
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