बीजू जनता दल (BJD) की नेता सुजाता राउत कार्तिकेयन ने सोमवार को MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर BJP के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के कल्याण के लिए पैसा जुटाने के मकसद से अपनी खनिज संपदा पर टैक्स लगाना राज्य का संवैधानिक अधिकार है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने संसद में इस बिल का समर्थन करने वाले ओडिशा के BJP सांसदों की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने ओडिशा के साथ अन्याय किया। उन्होंने कहा कि माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लागू करने से ओडिशा को राजस्व का भारी नुकसान होगा। सुजाता राउत कार्तिकेयन ने कहा ओडिशा का यह संवैधानिक अधिकार है कि वह अपनी खनिज संपदा पर टैक्स लगाए और इस तरह ओडिशा के लोगों और उनके विकास के लिए काम करे। 2004 में इसी संवैधानिक अधिकार के तहत, तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा के विकास के लिए एक कानून बनाया। माइनिंग कंपनियों ने उस कानून के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। BJD ने 20 साल तक ओडिशा के लोगों के अधिकारों के लिए कोर्ट में यह लड़ाई लड़ी। यह संघर्ष जारी रहा। 2026 में, सुप्रीम कोर्ट की नौ-सदस्यीय संवैधानिक बेंच का फैसला आया और वह ओडिशा के पक्ष में रहा।
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उन्होंने आगे कहा इससे ओडिशा को हजारों करोड़ रुपये पाने का अधिकार मिला और उसका संवैधानिक अधिकार भी सुरक्षित हुआ। लेकिन अचानक, 2026 में, BJP सरकार द्वारा लाए गए MMDR संशोधन कानून ने हमारा यह संवैधानिक अधिकार छीन लिया और ओडिशा को मिलने वाले इस पैसे को रोक दिया। ओडिशा जैसे राज्य के लिए यह पैसा बहुत महत्वपूर्ण है, और यह बहुत दुखद है कि BJP की ओर से ओडिशा से चुने गए सांसदों ने इस कानून के समर्थन में वोट दिया। उन लोगों ने ओडिशा के साथ अन्याय किया। इससे पहले उन्होंने संशोधन कानून के खिलाफ BJD के विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक यह संशोधन रद्द नहीं हो जाता, पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व में यह लड़ाई जारी रखेगी। सुजाता राउत कार्तिकेयन ने कहा, “ओडिशा का यह संवैधानिक अधिकार है कि वह अपनी खनिज संपदा पर टैक्स लगाए और इस तरह ओडिशा के लोगों और उनके विकास के लिए काम करे। 2004 में, इसी संवैधानिक अधिकार के तहत, तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा के विकास के लिए एक कानून बनाया। माइनिंग कंपनियों ने उस कानून के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। BJD ने 20 साल तक ओडिशा के लोगों के अधिकारों के लिए कोर्ट में यह लड़ाई लड़ी। यह संघर्ष जारी रहा। 2026 में, सुप्रीम कोर्ट की नौ-सदस्यीय संवैधानिक बेंच का फैसला आया और वह ओडिशा के पक्ष में रहा।
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उन्होंने आगे कहा, इससे ओडिशा को हजारों करोड़ रुपये पाने का अधिकार मिला और उसका संवैधानिक अधिकार भी सुरक्षित हुआ। लेकिन अचानक, 2026 में, BJP सरकार द्वारा लाए गए MMDR संशोधन कानून ने हमारा यह संवैधानिक अधिकार छीन लिया और ओडिशा को मिलने वाले इस पैसे को रोक दिया। ओडिशा जैसे राज्य के लिए यह पैसा बहुत महत्वपूर्ण है, और यह बहुत दुखद है कि BJP की ओर से ओडिशा से चुने गए सांसदों ने इस कानून के समर्थन में वोट दिया। उन लोगों ने ओडिशा के साथ अन्याय किया। इससे पहले उन्होंने संशोधन कानून के खिलाफ BJD के विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक यह संशोधन रद्द नहीं हो जाता, पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व में यह लड़ाई जारी रखेगी।
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