मिजोरम के BJP विधायक के ह्राह्मो ने राज्य में UCC लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे गैर-आदिवासी पुरुषों से शादी करने वाली मिजो महिलाओं को ज्यादा कानूनी सुरक्षा मिलेगी। आइजोल में BJP कार्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान ह्राह्मो ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि मिजोरम में गैर-आदिवासी लोगों की मौजूदगी को देखते हुए UCC लागू करने के मुद्दे की जांच होनी चाहिए। ह्राह्मो ने दावा किया कि कुछ गैर-आदिवासी पुरुषों की पहले से एक से ज्यादा पत्नियां हैं। इसके बावजूद वे मिजो महिलाओं से शादी करते हैं और बाद में उन्हें छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि UCC में एक पत्नी के प्रावधान के साथ तलाक की स्थिति में संपत्ति के बंटवारे के नियम भी हैं। इससे ऐसी शादियों में मिजो महिलाओं और उनके बच्चों की सुरक्षा हो सकती है। गैर-आदिवासी पुरुष पर पत्नी-बच्चों को छोड़ने के आरोप सियाहा जिले की पलक सीट से विधायक ह्राह्मो ने कहा कि कुछ गैर-आदिवासी पुरुष अपनी मिजो पत्नियों को कारोबार में शामिल करते हैं। कारोबार फेल होने पर वे महिलाओं और उनके बच्चों को छोड़ देते हैं। ह्राह्मो ने कहा कि UCC एक पत्नी की व्यवस्था देता है। इसमें तलाक होने पर संपत्ति के बंटवारे से जुड़े प्रावधान भी हैं। उनके मुताबिक, ये नियम ऐसी शादियों में मिजो महिलाओं की मदद कर सकते हैं। UCC को लेकर राजनीतिक विरोध का दावा BJP विधायक ने कहा कि लोग केंद्र सरकार के लाए कानूनों का अक्सर राजनीतिक कारणों या उनके प्रावधानों की सही जानकारी नहीं होने से विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कानूनों को शुरुआत में विरोध का सामना करना पड़ा था। बाद में वे कानून लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुए। ह्राह्मो ने कहा कि आदिवासी समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन कुछ राज्यों में UCC लागू हुआ है, वहां की आदिवासी आबादी को भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है। क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड… कांग्रेस पर लोगों को भटकाने का आरोप ह्राह्मो ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक फायदे के लिए UCC को खतरनाक बताया। इससे मिजोरम के लोगों में इसके प्रावधानों की पूरी जानकारी के बिना आशंका पैदा हुई। उन्होंने आदिवासी बहुल राज्यों में UCC की जरूरत पर विस्तृत अध्ययन कराने की मांग की। ह्राह्मो ने दोहराया कि गैर-आदिवासी लोगों से शादी करने वाली मिजो महिलाओं के शोषण से बचाने के लिए मिजोरम को UCC लागू करने पर विचार करना चाहिए। NDA शासित 22 राज्यों में लागू करने की तैयारी फिलहाल देश में 22 राज्यों में NDA की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से UCC लागू है। यानी बाकी 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC लागू करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित हो चुका है। अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने UCC का कानून तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं। केरलम की मुस्लिम संस्था UCC के विरोध में केरलम की मुस्लिम संस्था समस्त केरल जेम-इयातुल उलमा ने भी UCC का विरोध कर रही है। संस्था के अध्यक्ष मोहम्मद जिफ्री का कहना है कि सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि दूसरे धर्म जैसे- ईसाई, बौद्ध और जैन भी यूनिवर्सल सिविल कोड को स्वीकार नहीं कर पाएंगे। उनका कहना है कि मुस्लिमों में शादी, तलाक और विरासत धर्म का ही हिस्सा हैं। इनके लिए कुछ रूल्स और रेगुलेशन बनाए गए हैं, जिनका पालन करना होता है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… क्या चुनाव से पहले यूपी में लागू होगा UCC: भाजपा को फायदा या नुकसान; इससे क्या बदलेगा, क्या लिव-इन को भी कानूनी दर्जा मिलेगा गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने की अटकलें तेज हैं। इससे पहले उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है। मध्यप्रदेश, असम और गुजरात में बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी के इंतजार में है। यूपी में अभी लिव-इन (बिना शादी किए साथ रहना) को लेकर कोई कानून नहीं है। UCC में इससे जुड़े प्रावधान हो सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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