यह पद बहुत महतवपूर्ण है.आईआरजीसी के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी को 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार दिया गया था. हाल ही में मोहम्मद पाकपुर और हुसैन सलामी भी इजराइल-अमेरिका के हमलों में मारे गए थे. वाहिदी को अब ईरान की मिलिट्री की का नेतृत्व करना है.
अहमद वाहिदी कौन हैं?
वाहिदी आईआरजीसी के शुरुआती दिनों से जुड़े रहे हैं. 1970 के अंत में उन्होंने आईआरजीसी में काम शुरू किया और 1980 के दशक में खुफिया और मिलिट्री में अहम पद संभाले. ईरानी मीडिया के अनुसार उन्होंने 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स (आईआरजीसी की विदेशी ब्रांच) की कमान संभाली थी. बाद में यह कमान कासिम सुलेमानी को मिली, जिन्होंने मध्य पूर्व में ईरान का प्रभाव बढ़ाया.
खामेनेई ने क्या जिम्मेदारी दी थी
दिसंबर 2025 में दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने वाहिदी को आईआरजीसी का डिप्टी चीफ बनाया था. इससे पहले वे ईरानी आर्मी के डिप्टी चीफ थे. वाहिदी सिर्फ मिलिट्री अधिकारी नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक पद भी संभाल चुके हैं. वे महमूद अहमदीनेजाद के समय रक्षा मंत्री और इब्राहिम रईसी के समय गृह मंत्री रहे.
अमेरिका और इजराइल से क्या रहा है संबंध
वाहिदी ने इस्लामिक रिवॉल्यूशन की रक्षा को सबसे बड़ा अहम बताया है. 2025 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह क्रांति क्षेत्र और दुनिया की किस्मत बदलने वाली रोशनी थी. उन्होंने 1980 के दशक में ईरान-कॉन्ट्रा मामले में अमेरिका और इजराइल के साथ गुप्त बातचीत में भी हिस्सा लिया था.
क्या आरोप लगे हैं
उन पर आरोप भी लगे हैं. 1994 में अर्जेंटीना के अमिया ज्यूइश सेंटर पर हुए बम हमले (85 मौतें) में उनका नाम आया था. इंटरपोल ने रेड नोटिस जारी किया था, लेकिन ईरान ने इनकार किया. 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शनों पर दमन के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे.
क्यों लिया गया है फैसला
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहिदी एक सक्षम ब्यूरोक्रेट हैं. उनके पास मिलिट्री और राजनीति दोनों का अनुभव है, जो युद्ध के समय आईआरजीसी के लिए फायदेमंद है. पूर्व कमांडरों की तुलना में वे ज्यादा अनुभवी और सख्त फैसले लेने वाले माने जाते हैं. मौजूदा समय ईरान युद्ध के दौरान वाहिदी को काफी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है. आईआरजीसी अब सिर्फ मिलिट्री नहीं, बल्कि देश की रक्षा अब उसी के हाथ में है.
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