आईएमए ने साफ कहा है कि एक वर्ष का ब्रिज कोर्स MBBS की पढ़ाई और प्रशिक्षण की बराबरी नहीं कर सकता। BHMS डॉक्टरों का महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने से एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों के बीच का फर्क कम होता जाएगा।
ओपीडी, सर्जरीज, लैब सेवाएं बुरी तरह बाधित
महाराष्ट्र में दूसरे दिन भी रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण सेवाएं बुरी तरह बाधित हुईं। मुंबई में ओपीडी और भर्ती सेवाएं निलंबित रहीं, जिससे ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या और नए दाखिलों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कई पूर्व-निर्धारित या चुनिंदा ऑपरेशनों को टाल दिया गया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
- 2014- महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर्स एंड महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (संशोधन) अधिनियम लागू किया। इसके तहत BHMS डॉक्टरों को एक वर्ष का आधुनिक फार्माकोलॉजी (CCMP) सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने के बाद एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी गई। साथ ही उन्हें महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) और होम्योपैथी काउंसिल दोनों में पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराने का प्रावधान किया गया।
- 2016- IMA के विरोध के बावजूद राज्य ने CCMP कोर्स शुरू किया।
अब तक
- लगभग 12,500 होम्योपैथ डॉक्टर CCMP कोर्स पूरा कर चुके हैं।
- इनमें से करीब 2,500 डॉक्टरों ने MMC में पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।
मामला अदालत में- यह विवाद कई वर्षों से अदालत में लंबित है।
- 2025- अदालत के अंतरिम आदेश के बाद राज्य सरकार ने MMC को रजिस्ट्रेशन शुरू करने का निर्देश दिया।
- 4 अगस्त 2026- महाराष्ट्र इस प्रावधान को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया, जिसके बाद जूनियर डॉक्टरों का विरोध शुरू हो गया।
क्या है होम्योपैथ डॉक्टरों का तर्क
1.CCMP कोई नया कोर्स नहीं है, यह कई वर्षों से चल रहा है।
2. यह कोर्स डॉक्टरों को आधुनिक फार्माकोलॉजी और दवाओं के तार्किक उपयोग का प्रशिक्षण देता है।
3. BHMS डॉक्टर पहले से ही, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
4. उनका कहना है कि MMC में रजिस्ट्रेशन केवल उनकी अतिरिक्त योग्यता और प्रशिक्षण को मान्यता देता है।
क्या 1 साल के ब्रिज कोर्स से MBBS डिग्री को रिप्लेस कर सकते हैं
राज्य सरकार के फैसले की कड़ी आलोचनना करते हुए आईएमए प्रवक्ता ध्रुव चौहान ने कहा, ‘इससे तो 5.5 साल की MBBS डिग्री अब एक सर्टिफिकेट कोर्स से रिप्लेस कर दी जाएगी। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने फैसला किया है कि जो BHMS डॉक्टर मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करते हैं, वे महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए एलिजिबल हो जाएंगे और मॉडर्न दवाएं लिख सकेंगे। यह हाल के सालों में हेल्थकेयर पॉलिसी के सबसे खराब फैसलों में से एक है। अगर 5.5 साल की MBBS पढ़ाई, हजारों घंटे की क्लिनिकल पोस्टिंग, इमरजेंसी ड्यूटी और एक जरूरी इंटर्नशिप को मॉडर्न मेडिसिन की इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस के लिए मिनिमम जरूरत माना जाता है, तो एक छोटे सर्टिफिकेट कोर्स को बराबर कैसे माना जा सकता है? मजेदार बात यह है कि महाराष्ट्र में होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर एलोपैथी की प्रैक्टिस करने की इजाजत के लिए विरोध कर रहे हैं। इंडियन हेल्थकेयर सच में दुर्गती हो रही है।’
आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने CCMP के विरोध में क्या क्या तर्क दिए
CCMP को मान्यता नहीं: आईएमए का कहना है कि CCMP को न तो पूर्व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI), न नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और न ही नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) की मंजूरी मिली है। इसलिए यह कोर्स वैध नहीं माना जा सकता और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
दोहरी मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन का विरोध: आईएमए ने कहा कि एक डॉक्टर का दो अलग-अलग मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण भारत में पहले कभी नहीं हुआ। इससे मरीज डॉक्टर की योग्यता और इलाज की सीमा को लेकर भ्रमित हो सकते हैं।
मामला हाईकोर्ट में लंबित: आईएमए ने कहा कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल एक्ट में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में सरकार को अदालत का फैसला आने तक CCMP डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन नहीं करना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी का तर्क गलत: आईएमए के अनुसार, सरकार का यह कहना सही नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए यह फैसला जरूरी है। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी नहीं: आईएमए ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने एमबीबीएस छात्रों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा (रूरल बॉन्ड) की व्यवस्था इसलिए खत्म कर दी क्योंकि पर्याप्त खाली पद ही नहीं थे। इससे स्पष्ट है कि योग्य एलोपैथिक डॉक्टरों की कमी नहीं है।
एमबीबीएस छात्रों के साथ अन्याय: संगठन का कहना है कि कई वर्षों की पूर्णकालिक मेडिकल शिक्षा प्राप्त एमबीबीएस डॉक्टरों की तुलना पार्ट-टाइम CCMP कोर्स करने वाले चिकित्सकों से करना आधुनिक चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे छात्रों के साथ अन्याय होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
आईएमए ने Poonam Verma vs Ashwin Patel (1996) मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति में पंजीकृत डॉक्टर बिना संबंधित मान्यता और वैध रजिस्ट्रेशन के दूसरी चिकित्सा पद्धति की दवाएं नहीं लिख सकता और न ही उसका अभ्यास कर सकता।
केंद्र सरकार और NMC को भी शिकायत:
आईएमए ने चेतावनी दी कि यदि सरकार यह सरकारी आदेश (GR) वापस नहीं लेती और CCMP को बंद नहीं करती, तो आधुनिक चिकित्सा से जुड़े डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न के साथ देशव्यापी हड़ताल की जाएगी। आईएमए ने अपनी आपत्ति की प्रतियां प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की अध्यक्ष को भी भेजी हैं।
2017 से आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिख रही हैं होम्योपैथ डॉक्टर
मुंबई के चेंबूर स्थित एक होम्योपैथ डॉक्टर नेहा पवार ने बताया कि उन्हें नियमों के अनुसार एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति है, लेकिन उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वह 2017 से ही एलोपैथिक दवाएं लिख रही हैं। उन्होंने 2022 में मॉडर्न फार्माकोलॉजी (Modern Pharmacology) का एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) पूरा किया था। नेहा पवार मानखुर्द स्थित अपने क्लिनिक में मरीजों का इलाज करती हैं। यह इलाका संक्रामक बीमारियों की अधिकता वाला माना जाता है। उनका कहना है कि वह सिर्फ सामान्य बीमारियों का ही नहीं, बल्कि टीबी और गिलियन-बैरे सिंड्रोम जैसी गंभीर और जटिल बीमारियों में भी मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं देती हैं।
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