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अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर प्रतिबंध हटाया
अमेरिका के वित्त विभाग ने ईरान युद्ध खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौते के तहत, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट देते हुए 60 दिन का लाइसेंस जारी किया है। यह लाइसेंस ईरानी तेल के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री की अनुमति देता है। यह 21 अगस्त तक लागू रहेगा। इसके तहत ईरान से निकलने वाले कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई है। लाइसेंस के मुताबिक, ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, डिलीवरी या उतारने से जुड़े वे सभी जरूरी लेन-देन, जो पहले प्रतिबंधों के दायरे में आते थे, अब 21 अगस्त तक वैलिड रहेंगे। यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ, जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि स्विट्जरलैंड में ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी लंबी बातचीत ने एक सफल अंतिम समझौते के लिए अच्छी नींव तैयार की है। वार्ताकार युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे अमेरिका और इजराइल ने फरवरी में शुरू किया था।
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भारत के लिए क्यों अहम है ये छूट
भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बदलाव का उस पर बहुत असर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में हर बढ़ोतरी का असर भारत के आयात बिल, महंगाई दर, सरकारी बजट के हिसाब-किताब और आखिर में ग्राहकों द्वारा चुकाई जाने वाली ईंधन की कीमतों पर पड़ता है। पिछले चार सालों में देश के तेल खरीदने के तरीके में बहुत बड़ा बदलाव आया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में से एक बन गया है। अब भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई से 40 प्रतिशत तक है, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है। साथ ही, भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए खाड़ी क्षेत्र के उत्पादक देशों, जैसे सऊदी अरब, इराक और यूएई पर भी काफ़ी हद तक निर्भर है। 2025 में भारत के कच्चे तेल के आयात में OPEC देशों की हिस्सेदारी लगभग आधी थी। इस तरह की निर्भरता से जोखिम पैदा होता है, खासकर तब जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है।
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60 दिन के युद्ध विराम को स्थाई शांति समझौते में बदलने की कोशिश
दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में करीब 80 मिनट तक बातचीत हुई है। दोनों देश 60 दिन के युद्ध विराम को स्थाई शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। और दूसरी बड़ी बात वेंस ने कहा है कि मिलकर शांति के लिए काम करेंगे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा है कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक दोनों ही देश मिलकर शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं और ट्रंप अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदलना चाहते हैं। तीसरा बड़ा अपडेट क्या है? जल्दी से वह भी जान लीजिए। तीसरा बड़ा अपडेट है ट्रंप ने कहा ईरान लेबनान में अपने समर्थक हिजबुल्ला को तुरंत रोके। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा सख्त कारवाई करेगा। लेबनान में मौतों का आंकड़ा 4100 के पार हो चुका है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2 मार्च से अब तक 4106 लोगों की मौत 12,000 से ज्यादा लोग घायल। इजराइली सेना प्रमुख एल जमीर ने कहा कि हिजबुल्ला के साथ लड़ाई दोबारा शुरू हो सकती है। पांचवा बड़ा अपडेट कि ईरान का दावा क़तर में फंसे 6 अरब डॉलर मिलेंगे। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा अमेरिका के साथ हुए शुरुआती समझौते के तहत क़तर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे। उन्होंने दावा यह किया है कि समझौते की शर्तें तेहरान के पक्ष में है। तो वहीं स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ईरान के सांसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलिबा और विदेश मंत्री अब्बास अराची ओमान रवाना हो गए। दोनों नेता हॉर्मोस ट्रेड के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
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