ऑफिस की फाइलों, नियमों और हाजिरी रजिस्टर के बीच कई बार इंसानियत की सबसे बड़ी परीक्षा हो जाती है. एक तरफ सिस्टम की सख्ती होती है, तो दूसरी तरफ किसी कर्मचारी की निजी पीड़ा. जब भरोसे की जगह शक ले लेता है, तो हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं जहां सम्मान और संवेदनशीलता दोनों दांव पर लग जाते हैं. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही मामला तेजी से चर्चा में है, जिसने सरकारी दफ्तरों के रवैये पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
लखनऊ डिविजन में तैनात लोको पायलट के साथ हुई ज्यादती
बताया जा रहा है कि लखनऊ डिविजन में तैनात एक लोको पायलट हाल ही में गंभीर स्वास्थ्य समस्या के चलते सर्जरी से गुजरा. लोको पायलट को पाइल्स था और हाल ही में उसका ऑपरेशन हुआ था जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे आराम की सख्त सलाह दी थी. इसी आधार पर वह मेडिकल लीव लेने अपने वरिष्ठ अधिकारी के पास पहुंचा. लेकिन यहां से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
पेंट उतार दिया ऑपरेशन का सबूत फिर भी नहीं मिली छुट्टी?
सूत्रों के मुताबिक, जब कर्मचारी ने छुट्टी की बात रखी तो अधिकारी ने उसकी स्थिति पर संदेह जताया. कथित तौर पर उससे मेडिकल स्थिति साबित करने के लिए दबाव डाला गया. बताया जा रहा है कि हालात इतने असहज हो गए कि कर्मचारी को अपनी बीमारी का सबूत देने के लिए बेहद अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा और यहां तक की उसने अपनी पेंट तक उतार कर अपनी शारीरिक स्थिति दिखाकर यकीन दिलाने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद छुट्टी को लेकर सख्ती बरती गई और उसे छुट्टी नहीं मिली.
भड़के यूजर्स, लगा दी सिस्टम की क्लास
यह मामला जैसे ही बाहर आया, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कई यूजर्स ने इसे अमानवीय व्यवहार करार दिया. लोगों का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी ऑपरेशन के बाद आराम की मांग कर रहा है तो उस पर शक करने के बजाय संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. कुछ यूजर्स ने लिखा कि सरकारी तंत्र में भरोसे की कमी कर्मचारियों को मानसिक रूप से तोड़ देती है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मेडिकल सर्टिफिकेट जैसी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती.
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