यूएस अंतरराष्ट्रीय ट्रेड कोर्ट के फैसला के अनुसार, जिन कंपनियों ने IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ चुकाए थे, उन्हें रिफंड मिलने का हक है. जज रिचर्ड ईटन ने लिखा कि “सभी इंपोर्टर्स ऑफ रिकॉर्ड जिनकी एंट्रीज IEEPA ड्यूटीज के अधीन थीं, वे हाई कोर्ट के फैसले से फायदा पाने के हकदार हैं.” यह फैसला टेनेसी की एक फिल्ट्रेशन कंपनी Atmus Filtration के केस पर आया है, लेकिन जज ने कहा कि रिफंड से जुड़े सभी केस सिर्फ वह खुद सुनेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप टैरिफ को बताया था गैरकानूनी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने फरवरी में 6-3 के फैसले से ट्रंप के इन इमरजेंसी टैरिफ को गैरकानूनी बताया था, क्योंकि IEEPA कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता. ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में “लिबरेशन डे” टैरिफ लगाए थे, जो कई देशों पर 10% से शुरू होकर 50% तक जाते थे, और मैक्सिको, कनाडा, चीन जैसे देशों पर भी अलग-अलग टैरिफ थे. इनसे सरकार को करीब 130 अरब डॉलर (लगभग 97 अरब पाउंड) मिले थे.
क्या होगा टैरिफ रिफंड प्रोसेस?
अब रिफंड का प्रोसेस अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह ट्रंप के लिए बड़ी मुसीबत है, क्योंकि वे इन टैरिफ को बदलने की कोशिश कर रहे थे और रिफंड की संभावना से नाखुश थे. कई कंपनियां जैसे FedEx ने भी पूरे रिफंड के लिए मुकदमा दायर किया है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे बिजनेस की एक कोलिशन ‘We Pay the Tariffs’ के डैन एंथनी ने इसे “विजय” बताया और कहा कि अमेरिकी छोटे बिजनेस काफी इंतजार कर चुके हैं. उन्हें तेज और ऑटोमैटिक रिफंड मिलना चाहिए, कुछ भी कम स्वीकार्य नहीं. सरकार पर अब हजारों केस आ सकते हैं, और रिफंड की रकम 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है.
ट्रंप फिर लगाएंगे नए टैरिफ?
वहीं, ट्रंप प्रशासन अब नए टैरिफ लगा रहा है. ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा कि इस हफ्ते ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% किया जा सकता है. यह IEEPA टैरिफ की जगह लेगा, जो सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया. बेसेंट ने कहा कि 150 दिनों में अध्ययन के बाद सेक्शन 301 और 232 जैसे अन्य कानूनों से टैरिफ फिर से पुराने स्तर पर लौट आएंगे. ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि कई देशों पर टैरिफ लगेंगे, लेकिन देश निवेश और बदलाव के वादे पर कम रेट्स दे सकते थे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इन टैरिफ पर रोक लग गई, जिससे ट्रेड नेगोशिएशंस भी प्रभावित हुए.
व्हाइट हाउस ने कमेंट के लिए पूछे गए सवाल का तुरंत जवाब नहीं दिया. अमेरिका की इंपोर्ट टैक्स पॉलिसी आगे कैसे होगी, यह अभी अनिश्चित है.
भारत पर असर
भारत पर पहले 25 प्रतिशत ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ और फिर रूसी तेल खरीद के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया, जिससे कुल टैक्स 50 प्रतिशत तक पहुंच गई. हालांकि, हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच एक ट्रेड फ्रेमवर्क समझौता हुआ, जिसके बाद टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही गई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद, ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका में आने वाले सामान पर 15% की नई ग्लोबल लेवी (टैक्स) लगाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से टैरिफ के गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद ट्रंप ने दावा किया कि ‘भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील में कुछ भी नहीं बदलेगा और वो भुगतान करेंगे, जबकि अमेरिका को कुछ भी भुगतान नहीं करना होगा.’ अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि टैरिफ रिफंड कैसे और कब मिलेगा, यह प्रक्रिया भी अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है. यह फैसला ट्रंप की इकोनॉमिक पॉलिसी पर बड़ा असर डालेगा, क्योंकि टैरिफ उनके मुख्य एजेंडे का हिस्सा थे.
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