Russin Crude Oil : अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन तक रूसी कच्चा तेल खरीदने की छूट दी है. इस छूट के कारण रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद ये शिपमेंट आगे बढ़ सकते हैं.
अधिकारियों ने बताया कि इस छूट के कारण रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद ये शिपमेंट आगे बढ़ सकते हैं
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति लगातार बनी रहे, इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए अस्थायी 30 दिनों की छूट जारी कर रहा है. बेसेंट ने कहा, “यह जानबूझकर अल्पकालिक कदम है और इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन तेल लेनदेन की अनुमति देता है जो पहले से ही समुद्र में फंसे हुए हैं.”
रूसी तेल न लेने का दबाव बना रहा था अमेरिका
ये खरीद ऐसे समय हो रही है जब पिछले कई महीनों से वॉशिंगटन नई दिल्ली पर दबाव डाल रहा था कि वह रूस से तेल आयात कम करे, ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को को मिलने वाली आय सीमित की जा सके. हालांकि अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अस्थायी छूट देते हुए भारत को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने की अनुमति दे दी है.
क्या सीधा रूस से आएगा तेल?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 30 दिन की छूट जारी की है, जिसके तहत भारतीय रिफाइनरियों को पहले से समुद्र में ट्रांजिट में मौजूद रूसी कच्चे तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है. इस छूट के कारण रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद ये शिपमेंट आगे बढ़ सकते हैं.
रिफाइनरियों ने शुरू की बातचीत
रॉयटर्स के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी दिग्गज कंपनियां अब रूसी कच्चे तेल की तुरंत डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स के साथ सघन बातचीत कर रही हैं. रॉयटर्स के सूत्रों और उद्योग जगत के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सरकारी रिफाइनरियों ने अब तक ट्रेडर्स के माध्यम से लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल की खरीद पूरी कर ली है. विशेष रूप से एचपीसीएल (HPCL) और एमआरपीएल (MRPL) के लिए यह एक महत्वपूर्ण वापसी है, क्योंकि इन कंपनियों ने आखिरी बार पिछले साल नवंबर में रूसी कच्चा तेल खरीदा था.
छूट का दौर खत्म, अब प्रीमियम पर मिल रहा है तेल
ट्रेडर्स ने एक बदलाव की ओर इशारा किया है. पिछले महीने तक जो रूसी यूराल्स (Urals) कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों को भारी छूट पर मिल रहा था, उसकी कीमतें अब आसमान छू रही हैं. वर्तमान में, मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाली खेपों के लिए रूसी तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 4–5 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर ऑफर किया जा रहा है. यह स्थिति फरवरी की तुलना में बिल्कुल उलट है, जब संघर्ष शुरू होने से पहले भारत को करीब 13 डॉलर प्रति बैरल की आकर्षक छूट मिल रही थी.
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.