यह मुद्दा कर्मचारी संगठनों की हालिया बैठकों में प्रमुख रूप से उठाया गया है, जहां एक संयुक्त ज्ञापन तैयार किया जा रहा है जिसे वेतन आयोग को सौंपा जाएगा.
क्या है फैमिली यूनिट का मामला
7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन की गणना 3 उपभोग इकाइयों के आधार पर की गई थी. इसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चों को शामिल किया गया था. इसी आधार पर न्यूनतम बेसिक वेतन 18 हजार रुपये तय हुआ था.
अब कर्मचारी संगठन कह रहे हैं कि मौजूदा सामाजिक और आर्थिक हालात में माता पिता भी आश्रित होते हैं, इसलिए फैमिली यूनिट को 5 किया जाए.
अगर 5 यूनिट को आधार बनाया जाता है तो गणित के अनुसार 3 से 5 का अनुपात लगभग 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है. ऐसे में न्यूनतम बेसिक वेतन 18 हजार रुपये से बढ़कर 54 हजार रुपये या कुछ आकलनों के अनुसार 58 हजार 500 रुपये तक जा सकता है.
फिटमेंट फैक्टर और पेंशन पर असर
फिटमेंट फैक्टर, जो मौजूदा वेतन को नए वेतन में बदलने के लिए गुणक के रूप में काम करता है, वर्तमान में 2.57 है. कर्मचारी संगठन इसे 3 से 3.25 तक करने की मांग कर रहे हैं.
अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो न केवल कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, बल्कि पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेगी क्योंकि पेंशन अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत होती है.
अन्य प्रमुख मांगें
बैठकों में कई और मांगों पर भी चर्चा हो रही है, जिनमें शामिल हैं:
- वार्षिक वेतन वृद्धि 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करना
- पुरानी पेंशन योजना की बहाली
- पदोन्नति नीति में सुधार और कम से कम पांच पदोन्नतियां
- मकान किराया भत्ता, महंगाई भत्ता और अन्य भत्तों में संशोधन
- अवकाश नकदीकरण की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करना
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए 3 यूनिट का मॉडल अब पुराना हो चुका है.
अभी कहां तक पहुंची प्रक्रिया
8वें पे कमीशन की घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी. इसके कार्यक्षेत्र की शर्तें बाद में जारी की गईं, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कई अहम मांगें उसमें शामिल नहीं की गईं.
फिलहाल कर्मचारी पक्ष द्वारा एक संयुक्त ज्ञापन तैयार किया जा रहा है, जिसे वेतन आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा. अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा.
क्या यह फैसला पक्का है
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फैमिली यूनिट को 5 करने का प्रस्ताव अभी केवल मांग के स्तर पर है. इसे स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह पूरी तरह वेतन आयोग और सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा. यदि इसे मंजूरी मिलती है और 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाता है, तो वेतन और पेंशन में ऐतिहासिक वृद्धि संभव है. हालांकि अंतिम आंकड़े, कार्यान्वयन की तिथि और बकाया भुगतान का फैसला बाद में होगा.
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