Special Nepali Momo khandwa: खंडवा शहर की सिंधी कॉलोनी के पास एक छोटे से मोमोज स्टॉल पर हर शाम लंबी लाइन लग रही है. नेपाल मूल के प्रेम बहादुर इस स्टॉल पर असली नेपाली स्वाद वाले मोमोज बेचते हैं, जो महज 3 घंटे में ही खत्म हो जाते हैं. करीब 5–6 साल पहले महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के सामने शुरू हुआ यह छोटा व्यवसाय आज पहचान बना चुका है. प्रेम और उनकी पत्नी मिलकर रोज ताजा आटा, स्टफिंग और खास नेपाली मसालों की चटनी तैयार करते हैं. स्वाद के कारण ग्राहक बार-बार लौटकर आते हैं. प्रेम का सपना है कि आगे चलकर वे अपना बड़ा रेस्टोरेंट खोलें.
प्रेम बहादुर मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं. बेहतर रोजगार की तलाश उन्हें मध्य प्रदेश लेकर आई. शुरुआत में उन्होंने होटल लाइन में काम किया, लेकिन मन में कुछ अपना करने का सपना था. करीब 5 से 6 साल पहले उन्होंने खंडवा के महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के सामने छोटा सा नेपाली मोमोज स्टॉल शुरू किया. शुरुआत में लोगों को स्वाद नया लगा, लेकिन धीरे-धीरे उनके मोमोज का टेस्ट लोगों की जुबान पर चढ़ गया और आज हालत यह है कि रोजाना शाम को भारी भीड़ उमड़ती है.
पति-पत्नी दोनों मिलकर करते हैं काम
प्रेम बताते हैं कि वे रोज सुबह से ही मोमोज बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं. आटा गूंथने से लेकर स्टफिंग तैयार करने और खास नेपाली मसालों की चटनी बनाने तक का सारा काम वे खुद और उनकी पत्नी मिलकर करते हैं. दोपहर तक मोमोज तैयार हो जाते हैं और शाम 4 बजे स्टॉल लगने के बाद ग्राहकों की भीड़ लगना शुरू हो जाती है. रात 9 से 10 बजे तक ज्यादातर मोमोज खत्म हो जाते हैं. उनके स्टॉल पर वेज, पनीर, चीज और कॉर्न मोमोज की अलग-अलग वैरायटी मिलती है. वेज मोमोज 50 रुपए में 10 पीस, जबकि चीज और पनीर मोमोज 50 से 60 रुपए में मिलते हैं. प्रेम कहते हैं कि वे रोज करीब 1000 से 1500 रुपए तक की कमाई कर लेते हैं, जिससे महीने में 35 से 40 हजार रुपए तक की आमदनी हो जाती है.
ग्राहक बार-बार उनके स्टॉल पर लौटते हैं
प्रेम की खासियत सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साफ-सफाई भी है. वे बताते हैं कि मोमोज की चटनी खुद तैयार करते हैं और हाइजीन का पूरा ध्यान रखकर बनाते हैं. यही वजह है कि एक बार खाने वाले ग्राहक बार-बार उनके स्टॉल पर लौटकर आते हैं. प्रेम का परिवार अभी नेपाल में ही रहता है और वे यहां से कमाई कर अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चला रहे हैं. प्रेम कहते हैं कि खंडवा ने उन्हें पहचान और सम्मान दिया है. उनका सपना है कि आगे चलकर वे अपना बड़ा रेस्टोरेंट खोलें और लोगों को असली नेपाली स्वाद का अनुभव कराते रहें.
छोटे से स्टॉल से शुरू हुई यह कहानी आज मेहनत और स्वाद के दम पर सफलता की मिसाल बन चुकी है.
About the Author
Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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