केरलम पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को राज्य में लियोनेल मेस्सी-अर्जेंटीना फुटबॉल कार्यक्रम के विफल होने से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत मलयालम समाचार चैनल ‘रिपोर्टर टीवी’ के कोच्चि स्थित कार्यालय और उसके प्रवर्तकों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। पुलिस ने बताया कि कोच्चि और वायनाड में पांच स्थानों पर अदालत द्वारा जारी वारंट के आधार पर तलाशी की गई।
इनमें रिपोर्टर ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (आरबीसी) का कार्यालय, कंपनी के प्रवर्तक ऑगस्टीन बंधुओं के आवास और वायनाड स्थित उनका पैतृक घर शामिल हैं। चैनल के मुताबिक, तलाशी न्यूज डेस्क पर ली गई जहां सामान्य तौर पर केवल पत्रकार और तकनीकी कर्मचारी काम करते हैं। चैनल ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों के मोबाइल फोन ले लिये।
चैनल ने कहा कि इस कार्रवाई से उसका संचालन प्रभावित हुआ। एसआईटी का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) पी. विजयन ने कहा, ‘‘जब भी हम तलाशी लेते हैं तो लोगों से अपने मोबाइल फोन अलग रखने को कहते हैं। हमने एक भी मोबाइल फोन जब्त नहीं किया है।
हम न्यूज डेस्क को निशाना बनाने के इरादे से परिसर में नहीं गए थे। हमारा उद्देश्य दस्तावेज जुटाना है।’’
अधिकारी ने कहा कि डिजिटल लॉकर तक पहुंच से जुड़ी समस्या के कारण तलाशी की प्रक्रिया में अधिक समय लगा। उन्होंने बताया कि पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की गई।
पुलिस ने बताया कि यह तलाशी पिछली वाम सरकार के दौरान मेस्सी और अर्जेंटीना की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को केरलम लाने के असफल प्रयास से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच का हिस्सा थी। खेल विभाग द्वारा इस विवाद पर सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एसआईटी का गठन किया गया था। इससे पहले चैनल ने आरोप लगाया था कि अधिकारी आधे घंटे से अधिक समय तक कार्यालय में मौजूद रहे, लेकिन तलाशी का कारण या अन्य विवरण स्पष्ट नहीं किया।
साथ ही ड्यूटी पर आए पत्रकारों के निजी इस्तेमाल वाले मोबाइल फोन भी कथित तौर पर कब्जे में ले लिए गए। चैनल ने आरोप लगाया कि तलाशी का उद्देश्य उसके प्रसारण में बाधा डालना है। केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘रिपोर्टर टीवी’ के कार्यालय में पुलिस की तलाशी कानूनी जांच का हिस्सा है और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि एसआईटी ने प्राथमिकी दर्ज की थी और वारंट के आधार पर तलाशी की कार्रवाई की। सतीशन ने बताया कि जीएसटी विभाग ने भी इस मामले में जांच की थी और उसकी प्रारंभिक जांच में कथित जीएसटी धोखाधड़ी का पता चला था। ‘रिपोर्टर ब्रॉडकास्टिंग कंपनी’ (आरबीसी) इस प्रस्तावित कार्यक्रम की निजी वाणिज्यिक प्रायोजक थी और तत्कालीन राज्य सरकार ने उसे अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (एएफए) के साथ समझौता करने के लिए अधिकृत किया था।
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि न्यूज डेस्क में आना और पत्रकारों के फोन जब्त करना मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है। एक बयान में विजयन ने कहा कि पुलिसकर्मी तड़के ‘‘न्यूज डेस्क तक आ गए’’ और करीब डेढ़ घंटे तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने पत्रकारों की वीडियो रिकॉर्डिंग की।
विजयन ने इस कार्रवाई की तुलना अन्य राज्यों और दिल्ली में मीडिया संगठनों से जुड़े मामलों से की और कहा कि मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को मीडिया की स्वतंत्रता पर ‘‘हमले’’ को लेकर जवाब देना चाहिए। भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम और पार्टी के विधायक दल के नेता के. राजन ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिली प्रेस की स्वतंत्रता तथा बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डाली जा सकती।
उन्होंने चैनल और उसके पत्रकारों को अपना समर्थन भी दिया। विश्वम ने कहा कि मुख्यमंत्री को संविधान पढ़ना चाहिए। राजन ने कहा कि सतीशन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह प्रशासनिक आतंक है। अगर कुछ नहीं किया गया तो यह एक मिसाल बन जाएगा। इस तरह किसी चैनल के प्रसारण में बाधा डालना अस्वीकार्य और अभूतपूर्व है।’’
‘रिपोर्टर टीवी’ के प्रबंध निदेशक एंटो ऑगस्टीन ने कहा कि तलाशी के दौरान पुलिस ने मेस्सी कार्यक्रम को लेकर कोई सवाल नहीं किया।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि चैनल ने जांच में पूरा सहयोग किया है और वह मेस्सी कार्यक्रम से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
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