तिरुवनंतपुरम, पांच सितंबर केरलम में तिरुवनंतपुरम जिले के चिरायिनकीझु में कांग्रेस विधायक रम्या हरिदास और पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई जिसे लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। हरिदास ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने उन पर हमला किया और उन्हें धमकी दी जबकि जिला पंचायत सदस्य सजीत मुत्तमबलम तथा पार्टी नेता सजाद ने दावा किया कि विधायक व उनके सहयोगियों ने एक व्हॉट्सऐप पोस्ट को लेकर उनसे सवाल-जवाब किया, जिसके बाद झड़प हो गई।
शुक्रवार रात हुई इस घटना में हरिदास घायल हो गईं और उन्होंने चिरायिनकीझु तालुका अस्पताल में उपचार कराया। पुलिस ने बताया कि हरिदास के बयान के आधार पर सजीत और सजाद समेत कांग्रेस के सात कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, सजाद की शिकायत के आधार पर भी अलग मामला दर्ज किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह विवाद विधायक, निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में हुई प्रखंड पंचायत समिति की बैठक में हरिदास के कर्मचारी पलायम प्रदीप के शामिल होने से जुड़ा है। हरिदास ने कहा कि प्रदीप उनके निजी सहायक के रूप में काम कर रहे हैं जबकि सजाद ने इससे इनकार करते हुए दावा किया कि विधायक के निजी सहायक विमल नाम के एक अन्य व्यक्ति हैं। हरिदास ने पत्रकारों को बताया कि हाल में क्षेत्र में एक बैंक का चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के सदस्य तीन अलग-अलग पैनल से चुनाव लड़ रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने किसी भी पैनल के सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया क्योंकि मैं यह संदेश नहीं देना चाहती थी कि मैं किसी एक गुट का समर्थन कर रही हूं।’’
हरिदास ने आरोप लगाया कि इसके बाद सजाद ने व्हॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई बार नकारात्मक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने उनसे इन पोस्ट के बारे में पूछा तो सजाद ने कहा कि उन्होंने सजीत और विश्वनाथन के कहने पर ऐसा किया था।’’
हरिदास ने कहा कि बाद में सजाद ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए उन्हें अपने घर बुलाया और वह कुछ अन्य लोगों के साथ वहां गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद सजीत, अदीश, बिनॉय और कई अन्य लोग भी वहां पहुंचे तथा सजीत ने आक्रामक व्यवहार करते हुए उन्हें धमकी दी।
हरिदास ने पत्रकारों से कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्होंने हमें इस तरह बर्बाद करने की साजिश रची थी।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि सजीत ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि वह जिस रास्ते से आई हैं, उस रास्ते से वापस जाने के लिए उनके पैर नहीं बचेंगे। हालांकि, सजाद ने घटना के बारे में अलग दावा किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने पार्टी के एक व्हॉट्सऐप समूह में सवाल किया कि प्रदीप प्रखंड पंचायत समिति की बैठक में क्यों शामिल हुए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हरिदास के विधायक बनने के बाद से प्रदीप निर्वाचन क्षेत्र में अनुचित रूप से प्रभाव डाल रहे हैं और हमने बैठक में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाया था।’’
सजाद ने कहा कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे उनके संदेश पोस्ट करने के बाद हरिदास, प्रदीप और कई अन्य लोग रात में उनकी चिकन की दुकान पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन लोगों ने उनकी पत्नी एवं बेटी से मिलने की मांग की और फिर उन्हें दुकान से जबरन उनके घर ले जाया गया। सजाद ने कहा कि सजीत समेत कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता पहले से ही पास के एक चौराहे पर मौजूद थे और उनके घर जाते समय वे भी उनके साथ आ गए।
उन्होंने कहा, ‘‘घर पहुंचने के बाद प्रदीप ने अपना मोबाइल फोन निकाला और मेरी बेटी से व्हॉट्सऐप पोस्ट जोर से पढ़ने को कहा। जब मैंने इसका विरोध किया तो हरिदास ने प्रदीप का समर्थन किया।’’
सजाद ने दावा किया कि इसके बाद तीखी बहस हुई और सजीत ने इस घटना को लेकर विधायक से सवाल किया। घटना के सामने आए वीडियो में हरिदास वहां मौजूद कुछ लोगों के साथ बहस करती दिखाई दे रही हैं।
वीडियो में उन्हें ‘‘मेरा हाथ छोड़ो’’ कहते और ‘‘तुम कौन हो?’’ जैसे सवाल करते सुना जा सकता है। सजाद ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रही झड़प उस समय हुई जब हरिदास घटना की रिकॉर्डिंग कर रहे व्यक्ति की ओर बढ़ीं। उन्होंने हरिदास के इस दावे से इनकार किया कि उन्हें इस मामले पर चर्चा के लिए चाय पर उनके घर बुलाया गया था।
इसके बजाय सजाद ने आरोप लगाया कि हरिदास और उनके सहयोगी व्हॉट्सऐप पोस्ट को लेकर उनसे सवाल-जवाब करने के बाद उनके घर पहुंचे थे। सजाद ने कहा कि उन्होंने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए शिकायत दी है और उनकी पत्नी ने भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अभी तक उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की तिरुवनंतपुरम जिला इकाई और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने घटना का संज्ञान लिया है और मामले की प्रारंभिक जांच कराने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, जांच के तहत विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ताओं दोनों का पक्ष सुना जाएगा।
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