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कैश कांड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर हुए जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप दिया। 14 मार्च 2025 को जस्टिस यशवंत के दिल्ली वाले घर में आग लगने पर 500-500 के जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। विवाद बढ़ने के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के घर में जन्मे जस्टिस यशवंत वर्मा का बचपन इलाहाबाद में बीता। कानूनी पेशेवरों का हब माने जाने वाले इलाहाबाद में वे लीगल प्रोफेशनल्स के बीच पले-बढ़े।
यशवंत वर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स ऑनर्स में बैचलर्स किया। अपने पिता की लिगेसी को आगे बढ़ाते उन्होंने 1992 में एमपी की रीवा यूनिवर्सिटी से LL.B. कर अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी।सिविल अफेयर्स में प्रैक्टिस कर करियर की शुरुआत की और 2006 से 2012 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए बतौर स्पेशल काउंसल काम किया।
साल 2012 से अगस्त 2013 तक जस्टिस यशवंत वर्मा उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चीफ स्टैंडिंग काउंसल रहे। इसके बाद सीनियर एडवोकेट बने। 13 अक्टूबर 2014 को कॉलेजियम सिस्टम के तहत नॉमिनेट हुए और इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में प्रमोट हुए। फिर 1 फरवरी 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के परमानेंट जज बन गए।

500 के नोट मिलने पर जस्टिस वर्मा ने कहा था, ‘घर से नोट मिलना साबित नहीं करता कि ये मेरे हैं।’
11 अक्टूबर 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज अपॉइंट हुए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के जज के लिए जस्टिस चंद्र धरी सिंह के साथ शपथ ली थी।
घर से जली हुई नकदी मिलने के केस में ट्रांसफर हुए थे
मार्च 2024 में दिल्ली के उनके क्रेसेंट बंगले में आग लग गई थी। फायर ब्रिगेड की टीम जब मौके पर पहुंची तो उसे 500 के बंडलों के जले हुए ढेर मिले थे। मामला पब्लिक में आया तो जस्टिस यशवंत को दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रांसफर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया। वहां उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ तो ली, लेकिन उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। वे 5 जनवरी 2031 को रिटायर होने वाले थे।
9 अप्रैल को उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब घर में जली हुई नकदी के आरोपों की संसदीय जांच शुरू होने वाली थी। अब अगर राष्ट्रपति इस इस्तीफे को स्वीकार करती हैं तो जस्टिस वर्मा पर क्रिमिनल इनक्वायरी हो सकती है।

बंगले में आग बुझाने गई फायर ब्रिगेड की टीम को जली हुई नकदी मिली थी।
उनके कार्यकाल में लिए अहम फैसले
1. 2018 में ऑक्सीजन की कमी से मारे गए बच्चों के आरोपी डॉक्टर को जमानत दी
2018 में जस्टिस वर्मा ने एक अहम फैसले में डॉ. कफील खान को जमानत दे दी। कफील खान मेडिकल नेग्लिजेंस का आरोप में करीब 7 महीने से जेल में था। मामला गोरखपुर हॉस्पिटल का था, जहां एक साल पहले ऑक्सीजन न मिलने से 63 बच्चे और 18 लोग मारे गए थे।
2. 2022 में बंदूक लाइसेंस का नियम
2022 में जस्टिस वर्मा ने कहा कि लाइसेंस वाले व्यक्ति के पास आर्म्स एक्ट 1959 के तहत सिर्फ दो हथियार ही हो सकते हैं। राइफल क्लब या एसोसिएशन के मेंबर होने से ज्यादा की इजाजत नहीं।
3. 2023 में गोल्ड इंपोर्ट वाला फैसला
2023 में जस्टिस वर्मा की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला दिया कि कस्टम्स एक्ट 1962 के तहत गोल्ड इंपोर्ट ‘प्रतिबंधित’ है। उन्होंने कहा कि ‘प्रतिबंध’ शब्द में रेगुलेटेड या रिस्ट्रिक्टेड सामान भी आता है।
4. सत्यजीत राय की फिल्म ‘नायक’ का कॉपीराइट केस
साल 2023 में जस्टिस वर्मा की बेंच ने एक सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए, 1966 की बंगाली फिल्म ‘नायक’ का मालिकाना हक डायरेक्टर सत्यजीत राय दिया। RDB कंपनी के मालिक आर. डी. बंसल ने हार्पर कॉलिन्स को फिल्म की कहानी को नॉवेल बनाने से रोकने की कोशिश की थी।
5. दिल्ली हाईकोर्ट में टैक्स केस
दिल्ली हाईकोर्ट में उनके करीब साढ़े तीन साल के समय में जस्टिस वर्मा ने कई बड़े टैक्स मामले निपटाए। मार्च 2024 में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में कांग्रेस पार्टी की इनकम टैक्स की दोबारा जांच के खिलाफ वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि टैक्स अफसरों के पास ठोस सबूत हैं और करीब 520 करोड़ का टैक्स बच गया था।
स्टोरी- सोनाली राय
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