18 साल मह्रूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान के माता-पिता एक डॉक्टर हैं। JEE एडवांस्ड 2026 में मह्रूफ अहमद खान ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 32 और मसरूर ने AIR 169 हासिल कीष मह्रूफ की रैंक इतनी अच्छी थी कि उन्हें IIT बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस (BTech CSE) मिल सकता था।
जुड़वा भाईयों की रैंक
18 साल मह्रूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान के माता-पिता एक डॉक्टर हैं। JEE Advanced 2026 में मह्रूफ अहमद खान ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 32 और मसरूर ने AIR 169 हासिल कीष मह्रूफ की रैंक इतनी अच्छी थी कि उन्हें IIT बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस (BTech CSE) मिल सकता था। हालांकि, मसरूर को उसी ब्रांच में IIT बॉम्बे में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में दोनों भाइयों ने अलग-अलग IIT में पढ़ने के बजाय साथ रहने का फैसला किया। मह्रूफ ने IIT बॉम्बे की सीट छोड़ दी और अपने भाई मसरूर के साथ IIT कानपुर के BTech कंप्यूटर साइंस कार्यक्रम में दाखिला लेने का निर्णय लिया, जहां दोनों को एक ही ब्रांच मिल गई।
भाई से बढ़कर कुछ भी नहीं
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक महरूफ ने ओरिएंटेशन के अंतिम दिन में शामिल होने से कुछ मिनट पहले कहा कि मुझे IIT बॉम्बे छोड़कर अपने भाई के लिए IIT कानपुर आने का कोई पछतावा नहीं है। मेरे लिए मेरे भाई से बढ़कर कुछ भी नहीं है। दोनों भाइयों ने IIT-JEE की तैयारी के लिए कोटा में तीन साल साथ बिताए और 21 जुलाई को IIT कानपुर में दाखिला लिया।
मसरूर ने कहा कि उनके भाई का यह फैसला एक ऐसा त्याग है, जिसे वह कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा, “अब हम यहां भी हमेशा की तरह साथ रहेंगे। एक-दूसरे की गलतियों को सुधारेंगे, मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बनेंगे और सबसे अच्छे दोस्त बने रहेंगे।”
हॉस्टल के एक कमरे में रहते हैं जुड़वा भाई
IIT कानपुर पहुंचने पर शुरुआत में दोनों जुड़वां भाइयों को प्रशासन ने एक ही हॉस्टल में अलग-अलग कमरे आवंटित किए थे। मसरूर को कमरा B-209 मिला, जबकि महरूफ को B-308 दिया गया। इससे दोनों के लिए साथ में खाना खाना और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो रहा था। अधिकारियों से अनुरोध करने के बाद दो दिन पहले दोनों को हॉल ऑफ रेजिडेंस-13 के कमरा B-103 में साथ रहने की अनुमति मिल गई।
बेटों के लिए मां ने छोड़ी नौकरी
दोनों भाइयों की सफलता में उनकी मां डॉ. जीनत बेगम, जो पेशे से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) हैं, की अहम भूमिका रही। जब दोनों ने कोटा जाकर IIT-JEE की तैयारी करने का फैसला किया, तो उन्होंने ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड अस्पताल की अपनी नौकरी छोड़ दी और बेटों के साथ कोटा चली गईं, ताकि वे बिना किसी परेशानी के पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकें।
पिता हैं मेडिसिन में एमडी
वहीं, उनके पिता डॉ. मंसूर अहमद खान, जो मेडिसिन में एमडी हैं, नौकरी के कारण ओडिशा में ही रहे और हर दो-तीन महीने में बेटों से मिलने कोटा जाते थे। डॉ. जीनत बेगम ने कहा कि परिवार को पहले से अंदेशा था कि दोनों बेटों की अलग-अलग रैंक आने के कारण उन्हें अलग-अलग IIT मिल सकते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि दोनों बेटे अब एक ही संस्थान में हैं और एक ही कमरे में भी रह रहे हैं। JEE Advanced के नतीजे आने के बाद महरूफ के फैसले ने मुझे बहुत राहत दी।”
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