क्या एक और ‘यूक्रेन’ जंग शुरू होने जा रही है. ऐसी जंग, जो यूरोप या मिडिल-ईस्ट में नहीं बल्कि सुदूर-पूर्व में प्रशांत महासागर में लड़ी जाएगी, लेकिन उस जंग से जुड़े देश, भारत का दखल क्यों चाहते हैं? जापान के खिलाफ तीन देशों की घेराबंदी की और कैसे इस घेराबंदी को तोड़ने के लिए जापान ने भारत का रूख किया है. जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो जल्द भारत आएंगे.
शिंजीरो का दौरा इस मायने में अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले 15-20 दिनों में टोक्यो के संबंध रूस से काफी खराब हो गए हैं. इसके पीछे जापान का वो व्हाइट पेपर हैं, जिसमें प्रशांत महासागर में यूक्रेन युद्ध जैसे हालात को लेकर आशंका जताई गई थी. रूस-यूक्रेन युद्ध के खतरे को देखते हुए जापान ने अपने डिफेंस बजट को बढ़ाने की बात इस व्हाइट पेपर में की थी.
जापान ने रक्षा बजट में किया इजाफा
जापान का इस वर्ष का रक्षा बजट करीब 67 बिलियन डॉलर था, यानी करीब साढ़े छह लाख करोड़. ये बजट पिछले साल, 2025 के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत ज्यादा था. ये रक्षा बजट, जापान की जीडीपी का करीब 02 फीसदी था. ऐसे में रूस ने जापान के बढ़ते डिफेंस बजट को लेकर चिंता जताई थी. जापान ने अगले वर्ष यानी 2027 तक अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए एक खास शील्ड (SHIELD) का भी ऐलान किया है.
पुतिन के कुरील आईलैंड जाने से भड़का जापान
इस शील्ड में युद्धपोतों के एक मजबूत जंगी बेड़े के साथ समुद्री ड्रोन्स का एक बड़ा बेड़ा शामिल करना है. जापान ने पैसिफिक ओसियन में यूक्रेन जंग से हालात की बात कही तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जापान के करीब विवादित कुरील आईलैंड का दौरा शुरु कर दिया. इसको लेकर जापान की भौंहे तन गई और टोक्यो स्थित रूसी राजदूत को तलब कर फटकार लगा दी. क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले तक ये आईलैंड जापान के कब्जे में थे.
द्वितीय विश्वयुद्ध में मिली हार के बाद, जापान को ये कुरील आईलैंड रूस को देने पड़े थे. जापान अभी भी इन आईलैंड को अपना बताता है. ऐसे में रूस और जापान के बीच तनातनी जबरदस्त बढ़ गई है. अब भारत की रूस के साथ ऐतिहासिक दोस्ती रही है. ऐसे में शिंजीरो का दिल्ली दौरा अहम है. अगले महीने ब्रिक्स समिट (12-13 सितंबर) में हिस्सा लेने के लिए पुतिन का दिल्ली दौरा लगभग पक्का है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेना तय है.
प्रशांत महासागर में रूस-चीन के युद्धाभ्यास पर बिफरा जापान
जापान को रूस और चीन के प्रशांत महासागर में साझा समुद्री-युद्धाभ्यास भी कभी नहीं भाए हैं. क्योंकि जापान का चीन से भी सेनकाकू आईलैंड को लेकर लंबा विवाद रहा है. इसके अलावा जापान को इस बात की आशंका है कि चीन और रूस, उत्तर कोरिया के साथ मिलकर जापान की घेराबंदी करने की जुगत में है. 50 के दशक से यानी कोरिया प्रायद्वीप के विभाजन होने के बाद से ही उत्तर कोरिया और जापान की अदावत रही है.
विभाजन से पहले पूरा कोरिया, जापान के अधीन था. उस दौरान साम्राज्यवादी और उप-निवेश नीतियों के चलते जापान ने कोरिया पर जबरदस्त जुल्म ढाहे थे. जापानी सेना में कोरियाई महिलाओं को दासी (‘कम्फर्ट-वूमेन’) बनाकर रखने को लेकर भी कोरियाई देशों ने आज तक जापान को पूरी तरह माफ नहीं किया है. यही वजह है कि परीक्षण के दौरान उत्तर कोरिया की मिसाइल दक्षिण कोरिया के साथ साथ जापान के समंदर में जाकर भी गिरती हैं.
दक्षिण कोरिया की तरह जापान भी अमेरिका के साथ गठबंधन में है. ये भी उत्तर कोरिया के साथ तनातनी का एक बड़ा कारण हैं. यही वजह है कि किम जोंग उन जापान से संबंध सुधारने में विश्वास नहीं रखता है. उत्तर कोरिया के भी रूस के साथ मजबूत संबंध रहे हैं. किम जोंग उन को पुतिन की गिफ्ट दी हुई लिमोजिन कार में सवारी करते हुए देखा जा सकता है. यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस को मिसाइल और ड्रोन भी सप्लाई किए हैं. करीब 10 हजार उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क को यूक्रेन के कब्जे से छुड़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.
ताकाइची भारत का कर चुकीं दौरा
यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हाल में जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भी दिल्ली का दौरा किया था. उस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची को बहन के तौर पर संबोधित किया था. पीएम मोदी के जापान के पूर्व प्रधानमंत्री, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. शिंजो आबे से गहरी मित्रता थी. ताकाइची उन्हीं शिंजो आबे की पार्टी से ताल्लुक रखती हैं.
महुआ मोइत्रा होंगी गिरफ्तार? हेट स्पीच केस में वारंट जारी
मजबूत हुए भारत-जापान के रक्षा संबंध
हाल के वर्षों में भारत और जापान के रक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं. भारत और जापान की थल सेनाओं, सालाना साझा युद्धाभ्यास धर्म-गार्जियन करती हैं. इसके अलावा, दोनों देशों की नौसेनाएं, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मल्टीनेशनल मालाबार एक्सरसाइज करती हैं. यही वजह है कि पुतिन और शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे से ठीक पहले जापानी रक्षा मंत्री का दिल्ली दौरा होने जा रहा है. जापान के हालांकि, अमेरिका के साथ अच्छे सैन्य संबंध रहे हैं. लेकिन ईरान जंग ने समीकरण बदल दिए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि किसी भी मित्र-देश, चाहे फिर वो दक्षिण कोरिया हो या इंग्लैंड, जर्मनी या फ्रांस या फिर जापान. किसी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी की मदद नहीं की. ऐसे में जापान को भारत जैसे भरोसेमंद देश की जरूरत है. यानी भले भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, पुतिन और मोदी की दोस्ती जगजाहिर है. एलएसी पर तनातनी चल रही और अरूणाचल प्रदेश में चीनी मैप के बावजूद शी जिनपिंग का भारत दौरा तय है, लेकिन जापान भी भारत का अहम सामरिक साझेदार है. ऐसे में जापान को नजरंदाज कतई नहीं किया जा सकता, वो भी चीन के लिए.
क्या चीन अरुणाचल प्रदेश में 60 KM अंदर घुसा? अब आया भारत सरकार का जवाब
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.