- कॉपी लिंक
आज (मंगलवार, 22 सितंबर) जलझूलनी एकादशी यानी डोल ग्यारस है। गणेश उत्सव, एकादशी और मंगलवार के योग में भगवान गणेश के साथ ही विष्णु जी, श्रीकृष्ण और मंगल ग्रह की पूजा एक साथ करने का शुभ योग है। इनके अलावा शाम को सूर्यास्त के बाद तुलसी भी पूजा करेंगे, तो मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, एकादशी पर सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। गणेश जी को जल चढ़ाएं। दूर्वा, हार-फूल अर्पित करें। जनेऊ चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। मोदक का भोग लगाएं। पूजा में गणेश जी के मंत्र ऊँ गं गणपतयै नम: का जप करें।
महालक्ष्मी के साथ करें भगवान विष्णु का अभिषेक
जो लोग एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें गणेश पूजन के बाद महालक्ष्मी के साथ विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए, पूजा में एकादशी व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति को दिन में एक बार सिर्फ फलाहार करना चाहिए।
भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। पंचामृत दूध, दही, घी, मिश्री और शहद मिलाकर बनाते हैं। हार-फूल और लाल-पीले वस्त्रों से भगवान का श्रृंगार करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। पूजा के बाद भगवान से क्षमा याचना करें।
एकादशी पर पूरे अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए। व्रत करने के बाद अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह फिर से भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, इसके बाद स्वयं खाना खाएं। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।
सूर्यास्त के बाद करें तुलसी की पूजा
एकादशी पर श्रीहरि के साथ ही तुलसी की पूजा करने की परंपरा है। भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाते समय तुलसी के पत्ते भी जरूर रखना चाहिए। एकादशी की शाम तुलसी के दीपक जलाकर मंत्र जाप करना चाहिए। ध्यान रखें सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और स्पर्श भी नहीं करना चाहिए। तुलसी पूजा करते समय तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए-
तुलसी नामाष्टक मंत्र वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।
सूर्यास्त के बाद तुलसी की पूजा करें। तुलसी को हार-फूल, लाल वस्त्र अर्पित करें। फलों का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं। तुलसी के सामने बैठकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जप करें। जप की संख्या 108 होनी चाहिए। अगर ज्यादा समय न हो, तो 11 बार मंत्र का जप करें।
मंगल ग्रह के लिए करें मसूर की दाल का दान
जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन लोगों को हर मंगलवार मंगल ग्रह की पूजा करने की सलाह दी जाती है। एकादशी और मंगलवार के योग में मंगल ग्रह की भी पूजा करें। मंगल की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। शिवलिंग पर लाल गुलाल, लाल फूल, मसूर की दाल चढ़ाएं। शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। मंगल ग्रह के लिए जरूरतमंद लोगों को मसूर की दाल का दान करें। मंगलवार को हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
