इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अबू धाबी की गुप्त यात्रा और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाक़ात के बाद ईरान ने बेहद खतरनाक नतीजों की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने UAE में नेतन्याहू की मौजूदगी की कड़ी निंदा की और क्षेत्र के देशों से कहा कि वे इज़राइल से जुड़े सुरक्षा खतरों को लेकर सतर्क रहें। मंगलवार को जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का विदेश मंत्रालय ज़ायोनी शासन के बच्चों की हत्या करने वाले और युद्ध भड़काने वाले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) यात्रा की कड़ी निंदा करता है और क्षेत्र में कब्ज़ा करने वाले शासन की मौजूदगी के बेहद खतरनाक नतीजों के बारे में चेतावनी देता है। उन्होंने आगे कहा एक ऐसे अपराधी की मौजूदगी, जिसके हाथ लाखों बेगुनाह लोगों के खून से सने हैं और जिस पर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुकदमा चल रहा है, बेहद खतरनाक और चिंताजनक है।
ईरान ने इज़राइल पर इस्लामिक रिपब्लिक को बार-बार धमकाने का आरोप भी लगाया और इलाके की सरकारों को चेतावनी दी कि वे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों के लिए न होने दें जिनसे पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैल सकती है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा इलाके की सुरक्षा एक सामूहिक और अविभाज्य मामला है।” मंत्रालय ने इलाके की सरकारों से कहा कि वे “ज़ायोनी शासन की विनाशकारी मौजूदगी के लिए आधार तैयार करने से बचें” और अपनी ज़मीन को दूसरे देशों के खिलाफ़ गतिविधियों का मंच न बनने दें।
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नेतान्याहू की UAE यात्रा के दौरान क्या हुआ?
इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, नेतान्याहू ने रविवार को अबू धाबी की एक दिन की बिना पहले से घोषित यात्रा की और शेख मोहम्मद बिन ज़ायद से मुलाक़ात की। बाद में UAE ने अपनी सरकारी समाचार एजेंसी WAM के ज़रिए इस मुलाक़ात की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और इज़राइल व UAE के बीच रिश्तों को मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की। AFP के अनुसार, नेतान्याहू ने एक निजी विमान से यात्रा की और इज़राइल लौटने से पहले अबू धाबी में कई घंटे बिताए। उनके कार्यालय ने शुरू में इस यात्रा की घोषणा नहीं की थी।
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ईरान क्यों चिंतित है
अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ़ युद्ध शुरू किया और उनके सर्वोच्च नेता और अन्य शीर्ष अधिकारियों की हत्या कर दी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए और तेल की आपूर्ति के लिए अहम ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ को बंद कर दिया। रॉयटर्स की उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE पर ईरान के जवाबी हमलों को रोक दिया गया था।
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