प्रेमसुख डेलू का जन्म राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा तहसील के एक छोटे से गांव रायसर में हुआ। परिवार बेहद साधारण था, इसलिए उनका बचपन काफी कठिनाइयों से भरा था। उनके पिता किसान थे और परिवार का गुजारा चलाने के लिए ऊंट गाड़ी भी चलाते थे
कौन है प्रेमसुख डेलू
प्रेमसुख डेलू का जन्म राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा तहसील के एक छोटे से गांव रायसर में हुआ। परिवार बेहद साधारण था, इसलिए उनका बचपन काफी कठिनाइयों से भरा था। उनके पिता किसान थे और परिवार का गुजारा चलाने के लिए ऊंट गाड़ी भी चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, प्रेमसुख ने अपने परिवार की स्थिति बदलने की ठान ली थी और पूरी लगन व मेहनत के साथ पढ़ाई की।
गाय चराने का किया काम
इतना ही नहीं बहुत कम उम्र से ही प्रेमसुख अपने पिता के कामों में हाथ बटाते थे। वे गाय चराने का काम करते थे। उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा था। वे जानते थे कि शिक्षा ही उनके परिवार को इस गरीबी से बाहर निकाल सकती है। प्रेमसुख सरकारी स्कूल से पढ़े हैं जबकि उनकी बड़ी बहन ने कभी स्कूल की चौखट तक नहीं देखी। ऐसे में प्रेमसुख ने बचपन से ही सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते थे। जिसके लिए उन्होंने दिन-रात एक करके पढ़ाई की।
एमए और फिर गोल्ड मेडलिस्ट
प्रेमसुख ने इतिहास में एमए किया और गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे। इसके बाद उन्होंने इतिहास में ही यूजीसी नेट और जेआरएफ की परीक्षा पास की। प्रेमसुख ने पटवारी की नौकरी करते हुए मास्टर्स की डिग्री हासिल की और नेट भी पास किया।
6 साल के भीतर हासिल की 12 सरकारी नौकरियां
अपनी कड़ी मेहनत के दम पर प्रेमसुख ने 6 साल के भीतर ही 12 सरकारी नौकरियां हासिल कीं। शुरुआत में वे बीकानेर में पटवारी के पद पर तैनात थे, लेकिन उन्हें और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की चाहत थी। लिहाजा प्रेमसुख ने प्रतियोगी परीक्षाएं देना शुरू कर दिया। उन्होंने राजस्थान में आयोजित ग्राम सेवक परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर चुने जाने के बावजूद, उन्होंने इस पद को नहीं स्वीकारा और इसके बजाय राजस्थान असिस्टेंट जेल प्रिजन परीक्षा में सफल होने के बाद असिस्टेंट जेलर की भूमिका को प्राथमिकता दी।
नौकरी के साथ यूपीएससी क तैयारी
सरकारी नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अंततः प्रतिष्ठित UPSC परीक्षा पास कर ली। इससे वे IPS अधिकारी बन गए। पटवारी, एक स्थानीय सरकारी भूमि रिकॉर्ड अधिकारी होता है। लेकिन प्रेमसुख यहीं नहीं रुके और एक पुलिस अधिकारी बनने तक का सफर तय किया।
पुलिस कांस्टेबल परीक्षा में फेल लेकिन UPSC में पास
दिलचस्प बात ये है कि प्रेमसुख एक बार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देत हुए फेल हो गए थे लेकिन उनके मन में हताशा या हार का नामोनिशान तक नहीं आया। जिस पुलिस डिपार्टमेंट में वह बतौर कांस्टेबल असफल हुए थे उसी पुलिस महकमे में एक आईपीएस अधिकारी के रूप में वापस लौटे।
UPSC परीक्षा की दूसरी कोशिश में 170वीं रैंक
सिविल सेवा परीक्षा के अपने दूसरे प्रयास में, प्रेमसुख ने 170वीं रैंक हासिल की, जो एक बेहतरीन उपलब्धि है। आज प्रेमसुख डेलू उन लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं जो अपनी चुनौती भरी परिस्थितियों से ऊपर उठकर सफलता हासिल करना चाहते हैं।
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