दिग्गज कंपनी बर्कशायर हैथवे में वॉरेन बफे के रिटायर होने के बाद उनके बेटे हॉवर्ड बफे (71) को कंपनी का नया चेयरमैन बनाया है। हालांकि कंपनी का मुख्य कामकाज और सीईओ की कमान पहले से ही ग्रेगरी एबेल संभाल रहे हैं। अरबपति के बेटे होने के बावजूद हॉवर्ड का जीवन आम कॉर्पोरेट लीडर्स से अलग रहा है। पढ़िए रोचक किस्से… तीन भाई-बहन में हॉवर्ड दूसरे नंबर पर हैं। हॉवर्ड स्कूल के शुरुआती दिनों में बिल्कुल नहीं जानते थे कि उनके पिता एक मिलियनेयर हैं। एक दिन जब स्कूल में बच्चों से पूछा गया कि उनके पिता क्या काम करते हैं, तो हॉवर्ड और उनकी बहन सुसान ने जवाब दिया कि पिता ‘सिक्योरिटी गार्ड’ हैं। हालांकि कई साल बाद उन्हें ये बात समझ में आई। अरबपति का बेटा होने के बावजूद हॉवर्ड ने बचपन से खेती चुना। एकबार घर के पीछे की जमीन की मिट्टी को खोदकर खेत में बदल दिया। वहीं, कॉलेज के दिनों में बुलडोजर खरीद लिया और पेड़ हटाने और बेसमेंट खोदने का काम शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने 1500 एकड़ जमीन पर खुद खेती की। सितंबर 1997 में कनाडा के हडसन बे इलाके में वन्यजीवों की तस्वीरें लेते वक्त भालू ने उन पर हमला कर दिया। तब वे मरते-मरते बचे। हेलिकॉप्टर ने ऐन वक्त पर उनका रेस्क्यू किया। वहीं, 2012 में कांगो के गोमा शहर पर जब विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया, तब हॉवर्ड ने 48 घंटे के भीतर अस्पतालों के लिए जनरेटर और पानी की सप्लाई चालू करवाकर मरीजों की जान बची। 1999 से परोपकार में सक्रिय रहे हॉवर्ड की संस्था अब तक करीब 38 हजार करोड़ रु. खर्च कर चुकी है। हॉवर्ड ने 150 से अधिक देशों की यात्रा भी की है। कार के लिए पिता से की थी स्मार्ट डील 1973 में हाईस्कूल खत्म करते वक्त हॉवर्ड को नई कार खरीदनी थी, तो पिता से एक डील की। उन्होंने तय किया कि अगले तीन साल तक उन्हें जन्मदिन, क्रिसमस या ग्रेजुएशन पर कोई तोहफा न देकर इसके बदले अभी पैसे दिए जाएं। वॉरेन ने 5,000 डॉलर दिए, लेकिन कार महंगी थी। हॉवर्ड ने नौकरी करके 2,300 डॉलर जुटाए और कार खरीदी। हॉवर्ड फोटोग्राफर भी हैं। उन्होंने कई मौकों पर फोटोग्राफी भी की है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.