भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
सैक्स के मुताबिक अगले 25 साल से भी कम समय में भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस दौर में अमेरिका तीसरे स्थान पर रह सकता है, जबकि इस सदी के किसी चरण में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने भारत की बढ़ती आबादी और चीन में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार कम होने को भी इस बदलाव का एक अहम कारण बताया। उनके अनुसार भारत की तेज आर्थिक वृद्धि आने वाले समय में देश की वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।
भारत-चीन संबंधों को लेकर सैक्स का नजरिया
भारत-चीन संबंधों को लेकर सैक्स का नजरिया भी काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मतभेदों को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि यदि नई दिल्ली और बीजिंग आर्थिक स्तर पर सहयोग बढ़ाते हैं तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। व्यापार, विदेशी निवेश, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक सप्लाई चेन में सहयोग से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को फायदा मिल सकता है। उनका कहना है कि चीन के लिए भी भारत की आर्थिक सफलता फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इससे दुनिया में शक्ति का संतुलन अधिक बहुध्रुवीय बन सकता है।
अमेरिका की एकतरफा नीतियों पर भी सवाल
सैक्स ने अमेरिका की एकतरफा नीतियों पर भी सवाल उठाए और BRICS जैसे समूहों के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार BRICS वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी रखता है और दुनिया में शक्ति के संतुलन को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। उनका मानना है कि वैश्विक व्यवस्था अब पहले जैसी एकध्रुवीय नहीं रही है। अमेरिका, चीन, भारत और रूस जैसे बड़े देश अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र बन चुके हैं।
फिर से एशिया की ओर लौट रहा अर्थव्यवस्था का केंद्र
सैक्स ने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र धीरे-धीरे फिर से एशिया की ओर लौट रहा है। इतिहास में लंबे समय तक एशिया आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है और अब भारत तथा चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत इस बदलाव को नई दिशा दे सकती है। ऐसे में भारत-चीन संबंध आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार, निवेश और आर्थिक शक्ति संतुलन के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
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