आत्मविश्वास, प्रक्रिया पर भरोसा और टीम भावना अगर भारतीय निशानेबाजी की नई पीढ़ी की पहचान बन रही है तो रुद्रांक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ माने ने सोमवार को यहां एशियाई खेलों में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इसका एक और शानदार उदाहरण पेश किया। इस युवा तिकड़ी ने संयम और निरंतरता के साथ भारत को लगातार दूसरे दिन टीम स्पर्धा का पदक दिलाया जिससे निशानेबाजी में देश के पदकों की तीन हो गई है।
भारत ने तीनों ही रजत पदक जीते हैं। पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा का फाइनल आज ही होना है जिससे पदकों की संख्या और बढ़ सकती है। पूर्व विश्व चैंपियन 22 वर्षीय रुद्रांक्ष ने एक बार फिर साबित किया कि अभिनव बिंद्रा के बाद उन्हें क्यों भारत के बेहतरीन 10 मीटर राइफल निशानेबाजों में गिना जाता है। 20 वर्षीय हिमांशु और किशोर माने के साथ मिलकर उन्होंने भारत को 1890.1 अंक दिलाए। भारत चीन की टीम से पीछे रहा जिसने लगातार दूसरे दिन विश्व रिकॉर्ड बनाया।
चीन ने 1899.0 अंक जुटाए और पिछले साल काहिरा में बनाए अपने 1898.4 अंक के विश्व रिकॉर्ड में सुधार किया। दक्षिण कोरिया ने भी कड़ी चुनौती पेश की लेकिन 1884.2 अंक के साथ उसे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि चीन के रिकॉर्ड प्रदर्शन के बीच भारतीय तिकड़ी का संयम, विशेषकर पदार्पण कर रहे माने का प्रदर्शन सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला रहा। महज 18 वर्ष के माने अपने पहले एशियाई खेलों में हिस्सा ले रहे थे लेकिन दबाव भरे माहौल में वह बिल्कुल भी विचलित नजर नहीं आए।
जूनियर विश्व पदक विजेता माने ने अपनी दिनचर्या पर भरोसा बनाए रखा और ऐसा प्रदर्शन किया जिससे भारत पदक की दौड़ में मजबूती से बना रहा। रुद्रांक्ष ने 631.8 अंक के साथ व्यक्तिगत क्वालीफिकेशन में तीसरा स्थान हासिल किया जबकि हिमांशु 630.0 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहे। माने 628.3 अंक के साथ मामूली अंतर से शीर्ष आठ निशानेबाजों के व्यक्तिगत फाइनल में जगह बनाने से चूक गए लेकिन उनका योगदान अहम रहा क्योंकि टीम पदकों का फैसला क्वालीफिकेशन दौर के कुल अंकों के आधार पर होता है। माने के लिए यह पदक उस सफर का इनाम भी है जो लगभग संयोग से शुरू हुआ था।
सोलापुर में जन्मे और पले-बढ़े 12वीं कक्षा के छात्र माने को 13 साल की उम्र में निशानेबाजी से परिचित कराया गया। उनके पुलिस अधिकारी पिता ने उन्हें स्कूल में आयोजित ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया था। जो शुरुआत में महज रुचि के तौर पर शुरू हुआ था वह धीरे-धीरे गंभीर लक्ष्य में बदल गया। बेहतर सुविधाओं और ओलंपियन एवं कोच सुमा शिरूर के साथ प्रशिक्षण के लिए उनका परिवार मुंबई आ गया। सोमवार को एशियाई खेलों के मंच पर उस फैसले का परिणाम सामने आया।
हालांकि चश्मा पहने इस किशोर के चेहरे पर तत्काल जश्न के भाव नहीं थे। माने ने प्रतियोगिता के बाद शांत भाव से कहा, ‘‘जश्न के लिए इंतजार करना होगा।’’ उनके सामने तुरंत एक और चुनौती है। उन्हें मिश्रित टीम स्पर्धा में इलावेनिल वलारिवन के साथ जोड़ी बनानी है। माने ने कहा, ‘‘आज की प्रतियोगिता दबाव के लिहाज से सीखने का बहुत बड़ा अनुभव रही।
मैं अपनी प्रक्रिया पर कायम रहा और खुश हूं कि टीम के पदक में योगदान दे सका।’’ नवंबर में 19 वर्ष के होने वाले माने की नजर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदक जीतने पर है। रविवार को इलावेनिल, सोनम मस्कर और विदरसा विनोद ने महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत के अभियान की शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद इलावेनिल ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी एक और रजत पदक अपने नाम किया।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.