भारत के इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल प्रोग्राम को लेकर एक अख़बार की रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद अब नई दिल्ली और भूटान के एक पब्लिकेशन के बीच नई बहस का कारण बन गया है। इस असहमति का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने कभी भूटान को E20 पेट्रोल सप्लाई करने का प्रस्ताव दिया था या नहीं। भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘द भूटानीज़’ में छपी रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी OMC ने भूटान को E20 पेट्रोल देने का प्रस्ताव नहीं दिया था और न ही इस ईंधन के निर्यात का कोई प्रस्ताव औपचारिक रूप से तैयार किया गया था। इसके कुछ ही समय बाद, अख़बार के एडिटर तेनज़िंग लामसांग ने पिछले हफ़्ते छपी अपनी स्टोरी का बचाव किया।
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लामसांग ने एक्स पर भूटान के व्यापार विभाग का लिखित जवाब साझा किया, जिसमें कहा गया है कि देश भारत से ई20 पेट्रोल का आयात नहीं कर रहा है। अपने जवाब में विभाग ने कहा कि ईंधन की नमी सोखने की क्षमता (यानी आसपास के वातावरण से पानी के अणुओं को आकर्षित और अवशोषित करने की क्षमता) के कारण पानी से दूषित होने का खतरा अधिक है, जिससे ईंधन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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इसमें आगे कहा गया कि उसने टेक्निकल मीटिंग्स के दौरान भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों से पारंपरिक पेट्रोल की सप्लाई जारी रखने का अनुरोध किया था, क्योंकि उसके मौजूदा अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को संभालने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इस विवाद की मुख्य वजह उन बातचीत की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। जहां एक अख़बार की रिपोर्ट में भूटान सरकार के उस पत्र-व्यवहार का ज़िक्र किया गया है जिससे पता चलता है कि अधिकारियों ने भारतीय ईंधन आपूर्तिकर्ताओं से पारंपरिक पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने को कहा था, वहीं भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि किसी भी OMC ने भूटान को कभी E20 पेट्रोल की पेशकश नहीं की थी और न ही निर्यात का कोई प्रस्ताव था।
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