हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत के खिलाफ युद्ध की गीदड़भभकी दी है। एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ तो इस्लामाबाद भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने पानी को पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया कि भारत अगर जल आपूर्ति रोकने की दिशा में आगे बढ़ता है तो हालात युद्ध तक पहुंच सकते हैं। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया था कि आतंकवाद और बातचीत अब साथ-साथ नहीं चल सकते।
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उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के तहत सिंधु बेसिन से मिलने वाले जल से पाकिस्तान की करीब अस्सी प्रतिशत खेती चलती है। लेकिन दशकों तक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को अब इस बात का डर सताने लगा है कि संधि स्थगित होने के बाद भारत अपने हिस्से के जल का पूर्ण उपयोग करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जैसे जैसे भारत अपने अधिकार के पानी का इस्तेमाल बढ़ाएगा, वैसे वैसे पाकिस्तान की पहले से डगमगाती अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था पर संकट और गहराता जाएगा।
साथ ही ख्वाजा आसिफ ने भारत पर चिनाब नदी के प्रवाह को हथियार की तरह इस्तेमाल करने और जल संबंधी सूचनाएं रोकने का आरोप लगाया है। हम आपको यह भी बता दें कि पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। सिंध और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई नहरों में भारी जल कमी दर्ज की गई है, जबकि पंजाब प्रांत पर तय हिस्से से ज्यादा पानी लेने के आरोप लग रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान के प्रांतों के बीच पानी को लेकर टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। यानी अपने ही घर में जल संकट और अव्यवस्था संभालने में नाकाम पाकिस्तान अब भारत पर आरोप लगाकर अपनी जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की तैयारी चल रही है
लेकिन पाकिस्तान को समझना होगा कि यह पुराना भारत नहीं है। पिछले महीने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने साफ शब्दों में दुनिया को बता दिया था कि भारत हर चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और यदि जरूरत पड़ी तो ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तीनों सेनाएं चौबीसों घंटे तैयारी कर रही हैं। सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच तालमेल मजबूत किया जा रहा है और भविष्य के युद्ध की हर परिस्थिति को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई जा रही है। जनरल द्विवेदी का यह बयान भारत की सैन्य शक्ति और आत्मविश्वास का परिचायक था। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध का मैदान पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है, जहां दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। भारतीय सेना सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर सजग है।
पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि भारत अब हर मोर्चे पर निर्णायक जवाब देने की क्षमता रखता है। आतंकवाद, घुसपैठ, जल विवाद या सीमा पर उकसावे की हर हरकत का जवाब नए भारत की सेना उसी भाषा में देना जानती है। ख्वाजा आसिफ की गीदड़ भभकियां पाकिस्तान की कमजोरी और डर को उजागर करती हैं, जबकि भारतीय सेना का शौर्य, अनुशासन और तैयारी यह साबित करती है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को इस बार बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
भारत और पाक सैन्य क्षमता की तुलना देखिये
फिर भी यदि मान लिया जाए कि अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की हिमाकत करता है तो सवाल उठता है कि भारत क्या करेगा? इसका जवाब यह है कि इस बार भारत की ओर से केवल सीमा पर जवाब नहीं मिलेगा, बल्कि जमीन, आसमान और समंदर तीनों मोर्चों पर पाकिस्तान को ऐसी मार झेलनी पड़ सकती है जिसकी कल्पना भी इस्लामाबाद के हुक्मरानों ने नहीं की होगी। भारतीय सेनाध्यक्ष के बयानों के अलावा, दुनिया भर की रक्षा रिपोर्टों और सैन्य विश्लेषणों का अध्ययन बताता है कि पारंपरिक युद्ध क्षमता, आधुनिक हथियारों, आर्थिक ताकत, सैन्य तकनीक और रणनीतिक तैयारी के मामले में भारत पाकिस्तान पर कई गुना भारी पड़ता है।
हम आपको बता दें कि दुनिया की सबसे अनुभवी और विशाल सेनाओं में शामिल भारतीय थलसेना के पास सैनिक संख्या, आधुनिक तोपखाना, मिसाइल शक्ति और युद्धक टैंकों का ऐसा जाल है जो पाकिस्तान की जमीनी रक्षा को चंद दिनों में चरमरा सकता है। भारत के पास पिनाका बहु नली रॉकेट प्रणाली, धनुष तोप, K9T अजय टैंक, T90 भीष्म टैंक और ब्रह्मोस जैसी घातक मारक क्षमता है। ब्रह्मोस मिसाइल ध्वनि की गति से कई गुना तेज रफ्तार से दुश्मन के ठिकानों को मिट्टी में मिला सकती है। हाल के वर्षों में भारत ने स्वदेशी रक्षा निर्माण को तेजी से मजबूत किया है, जिसके कारण सेना को लगातार आधुनिक हथियार और तकनीक मिल रही है।
भारतीय सेना का सबसे बड़ा फायदा उसका वास्तविक युद्ध अनुभव और ऊंचे पर्वतीय इलाकों से लेकर रेगिस्तान तक हर परिस्थिति में लड़ने की क्षमता है। दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना लंबे समय से आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सीमित संसाधनों से जूझ रही है। साथ ही भारत की रक्षा बजट क्षमता पाकिस्तान से कई गुना अधिक है, जिससे हथियारों की खरीद, तकनीकी उन्नयन और युद्ध तैयारी लगातार मजबूत होती जा रही है। साथ ही भारत रक्षा क्षेत्र में काफी हद तक आत्मनिर्भर है जबकि पाकिस्तान पूरी तरह चीन और दूसरे देशों पर निर्भर है।
वहीं भारतीय वायुसेना की बात करें तो यह वह ताकत है जो किसी भी आधुनिक युद्ध का रुख घंटों में बदल सकती है। भारतीय वायुसेना के पास रॉफेल, सुखोई तीस एमकेआई, तेजस और मिराज जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं। रॉफेल को दुनिया के सबसे खतरनाक बहुउद्देश्यीय युद्धक विमानों में गिना जाता है। इसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता और अत्याधुनिक राडार प्रणाली पाकिस्तान के अधिकतर विमानों पर भारी पड़ सकती है। कई वैश्विक सैन्य अध्ययनों में माना गया है कि भारत की वायु शक्ति संख्या और तकनीक दोनों में पाकिस्तान से बहुत आगे है।
भारतीय वायुसेना की सबसे घातक ढाल एस-400 वायु रक्षा प्रणाली है। यह प्रणाली सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर सकती है। हालिया सैन्य अभियानों और अभ्यासों में इस प्रणाली ने साबित किया कि पाकिस्तान की हवाई घुसपैठ या मिसाइल हमले को भारतीय रक्षा कवच के सामने टिकना बेहद कठिन होगा।
समंदर की बात करें तो भारतीय नौसेना पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता पर भारी बढ़त रखती है। भारत के पास विमानवाहक पोत विक्रांत, परमाणु पनडुब्बी अरिहंत, अत्याधुनिक युद्धपोत, विध्वंसक जहाज और लंबी दूरी तक मार करने वाली समुद्री मिसाइलें हैं। भारतीय नौसेना अरब सागर में पाकिस्तान के बंदरगाहों और समुद्री आपूर्ति मार्गों को घेर सकती है। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है और यदि भारतीय नौसेना ने नाकेबंदी कर दी तो पाकिस्तान के लिए ईंधन, हथियार और व्यापारिक आपूर्ति बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
इसके अलावा, भारत की सबसे बड़ी ताकत केवल हथियार नहीं बल्कि तीनों सेनाओं के बीच बढ़ता तालमेल भी है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत भविष्य के युद्ध के लिए चौबीसों घंटे तैयारी कर रहा है और तीनों सेनाएं मिलकर समन्वित युद्ध रणनीति पर काम कर रही हैं। आधुनिक निगरानी प्रणाली, सूचना युद्ध, उपग्रह क्षमता और त्वरित हमला करने की तैयारी भारत को निर्णायक बढ़त देती है।
हालांकि यह भी सच है कि दोनों देशों के पास परमाणु हथियार हैं और किसी भी पूर्ण युद्ध का परिणाम पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकता है। लेकिन पारंपरिक युद्ध क्षमता की बात करें तो वैश्विक रक्षा विश्लेषण साफ संकेत देते हैं कि भारत संख्या, तकनीक, अर्थव्यवस्था, हथियारों और रणनीतिक तैयारी के मामले में पाकिस्तान पर स्पष्ट रूप से भारी पड़ता है। यही कारण है कि पाकिस्तान बार बार गीदड़ भभकियां तो देता है, लेकिन सीधे युद्ध की कीमत चुकाने का साहस शायद ही जुटा पाए।
निर्णायक है मोदी का नेतृत्व
बहरहाल, सैन्य ताकत के साथ-साथ भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसका निर्णायक नेतृत्व भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के सामने एक ऐसे सख्त और स्पष्ट नेता की छवि बनाई है जो देश की सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करता। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर से लेकर आतंकवाद के खिलाफ कड़े वैश्विक अभियान तक, मोदी ने यह साबित किया है कि नया भारत केवल चेतावनी नहीं देता बल्कि जवाब भी देता है। आज दुनिया के प्रमुख देशों के साथ भारत के मजबूत रणनीतिक संबंध हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मोदी की बात को गंभीरता से सुना जाता है। दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की स्थिति अपने ही देश में कमजोर और विवादों से घिरी हुई है। आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद की छाया से जूझते पाकिस्तान के नेतृत्व की तुलना भारत के मजबूत और आत्मविश्वासी नेतृत्व से नहीं की जा सकती। यही कारण है कि जब भारत का नेतृत्व दृढ संकल्प के साथ खड़ा होता है तो पाकिस्तान की धमकियां दुनिया को खोखली और बौखलाहट भरी ही नजर आती हैं।
-नीरज कुमार दुबे
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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