रिपोर्ट में हाल ही में ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुई स्थिति का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत अपनी LNG और LPG जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस जैसे देशों पर निर्भर है। खासकर कतर से आने वाली गैस का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। ऐसे में अगर इस समुद्री मार्ग में कोई बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में भारत के लिए अच्छी खबर भी है। IGU का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो अगले कुछ सालों में दुनिया भर में LNG की सप्लाई काफी बढ़ेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में गिरावट आ सकती है। एशिया के कुछ देशों में गैस की मांग कमजोर होने से भी कीमतें नीचे आ सकती हैं, जिसका फायदा भारत को मिल सकता है। लेकिन इस अवसर का लाभ तभी मिलेगा, जब भारत का घरेलू गैस बाजार ज्यादा लचीला और प्रतिस्पर्धी होगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को LNG टर्मिनलों तक आसान पहुंच, पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, गैस ट्रांसपोर्ट शुल्क में सुधार और बाजार आधारित मूल्य निर्धारण (Pricing Reforms) जैसे कदम उठाने चाहिए। खासकर उत्तर, पूर्व और मध्य भारत में पाइपलाइन नेटवर्क अभी भी काफी सीमित है, जिसके कारण उद्योगों तक गैस महंगी पहुंचती है। इसी वजह से कई कंपनियां अभी भी कोयले का इस्तेमाल करना ज्यादा सस्ता मानती हैं।
IGU का कहना है कि सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस सस्ती होने से भारत में खपत नहीं बढ़ेगी। इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम, पारदर्शी नियम और गैस बाजार में सुधार बेहद जरूरी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत इन सुधारों को तेजी से लागू करता है, तो प्राकृतिक गैस देश के ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, उद्योगों को सस्ता ईंधन मिलेगा और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
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